Zener Diode | genius invent by Clarence Zener in 1934

Zener Diode and its procedure

Zener Diode symbol
Zener Diode symbol

Zener Diode वो डायोड है, जो एक साधारण डायोड की भाँति बिजली को अग्र दिशा में बहने की ही नहीं बल्कि यदि वोल्टेज, ब्रेकडाउन वोल्टेज से (“जेनर नी वोल्टेज” या “जेनर वोल्टेज”) ज्यादा हुआ तो पश्च दिशा में भी बहने की अनुमति देता है।

अतः यह सामान्य डायोड की भाँति एक P-N सिलिकॉन जंक्शन होता है। इसके safe inverse voltage या break down voltage का मान सामान्य डायोड की अपेक्षा कम और निश्चित होता है। ब्रेक डाउन वोल्टेज मान से थोड़ी भी अधिक विपरीत बायस पर विपरीत दिशा में बहने वाली लीकेज करंट का मान एकाएक बढ़ जाता है। इस उपकरण को Clarence Zener के नाम पर जेनर डायोड कहा गया, जिन्होने इस विद्युत गुण की खोज 1934 में की।

Zener Diode
Zener Diode

एक पारंपरिक ठोस-अवस्था वाला डायोड प्रयाप्त बिजली की अनुमति नहीं देगा यदि वह रिवर्स ब्रेकडाउन वोल्टेज से नीचे रिवर्स-बायस्ड है। जब रिवर्स-बायस्ड ब्रेकडाउन वोल्टेज बढ़ जाता है, तो ऐवलांश ब्रेकडाउन के कारण एक पारंपरिक डायोड उच्च बिजली के अधीन हो जाता है। यदि यह विद्युत प्रवाह बाह्य परिपथाकार द्वारा सीमित नहीं किया जाता, तो यह डायोड स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो जाता है। भारी मात्रा में फोरवर्ड बायस्ड की अवस्था में , डायोड अपने जंक्शन अन्तस्थ वोल्टेज और आंतरिक प्रतिरोध के कारण वोल्टेज में गिरावट प्रदर्शित करता है। वोल्टेज की गिरावट की राशि, अर्धचालक पदार्थ और डोपिंग सांद्रता पर निर्भर करती है।

इस स्थिति में बहने वाली करंट Avlanche current या zener current कहलाती है । Zener Diode के इसी गुण के आधार पर इसका उपयोग वोल्टेज रैगुलेटर सर्किट्स (वोल्टेज मान में होने वाले परिवर्तन को समायोजित करने वाला सर्किट) में किया जाता है ।

Zener Diode regulator circuit
Zener Diode regulator circuit


Zener Diode की एक सीरीज रेसिस्टर के साथ रैगुलेट किये जाने वाले वोल्टेज स्रोत के पैरेलल में विपरीत दिशा में जोड़ा जाता है। डायोड के पैरेलल में लोड रेसिस्टर लगाया जाता है । जब इनपुट वोल्टेज का मान Zener Diode के ब्रेक डाउन वोल्टेज मान से अधिक हो जाता है तो सीरीज रेसिस्टर RS में से जीनर करंट बहने लगती है। RS में से बहने वाली कुल करंट का मान लोड + जीनर करंट के बराबर होती है।

Zener Diode का लाक्षणिक वक्र
Zener Diode का लाक्षणिक वक्र

इनपुट वोल्टेज का मान बढ़ने पर Rs में से बहने वाली करंट का मान ओर बढ़ जायेगा। परन्तु जीनर डायोड का रेसिस्टेन्स घट जाने के कारण जीनर करंट का मान ही बढ़ेगा, लोड करंट का नही इस प्रकार Rs के एक्रोस अधिक वोल्टेज ड्राप पैदा होगा और आउटपुट वोल्टेज का मान लगभग यथावर्त हो जायेगा इस प्रकार यह सर्किट एक वोल्ट से कम के परिवर्तन पर भी प्रभावी रूप से कार्य करता है। जीनर डायोड पर उसके ब्रेक डाउन वोल्टेज का मान अंकित रहता है। जैसे – 12V , 27V आदि।

डोपिंग प्रक्रिया के द्वारा निपात वोल्टेज को पर्याप्त रूप में नियंत्रित किया जा सकता हैं। जबकि क्षमता 0.05% के भीतर उपलब्ध है, सबसे अधिक व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली क्षमता 5% और 10% है।

एक और व्यवस्था, जो ऐसे ही समान प्रभाव उत्पन्न करते हैं, अवधाव प्रभाव है, जैसा कि अवधाव डायोड में होता है वास्तव में दोनों प्रकार के डायोड एक ही तरह से बनाए गए हैं और इस तरह के डायोड में दोनों प्रभाव मौजूद हैं। 5.6 वोल्ट तक के सिलिकॉन डायोड में जेनर प्रभाव एक प्राधान्य प्रभाव है और एक चिह्नित प्रतिकूल तापमान गुणांक दिखाता है। 5.6 वोल्ट से ऊपर, अवधाव प्रभाव प्रबल हो जाता है और धनात्मक तापमान गुणांक प्रदर्शित करता है।

Zener Diode
जेनर वोल्टेज पर निर्भर TC


एक 5.6 डायोड में, दो प्रभाव एक साथ होते हैं और उनके तापमान गुणांक बड़े सुव्यवस्थित ढंग से एक दूसरे को रद्द कर देते हैं इसलिए 5.6 V डायोड तापमान संबंधित महत्वपूर्ण अनुप्रयोगों में पसंदीदा घटक है।

आधुनिक निर्माण तकनीक ने 5.6 V से कम वोल्टेज वाले नगण्य तापमान गुणांक के उपकरणों का उत्पादन किया है, लेकिन जब उच्च वोल्टेज उपकरणों का सामना किया गया तो तापमान गुणांक प्रभावशाली रूप से बढ़ जाता है। एक 75V के डायोड में 12V के डायोड के गुणांक से 10 गुना ज्यादा है।

ऐसे सभी डायोड अपने ब्रेकडाउन वोल्टेज की परवाह न करते हुए, सामान्य रूप से Zener Diode के नाम के अंतर्गत विपणन किये जाते हैं।

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