Whether Solar Panel is the right choice now

Solar Panel

प्रायः सोलर पैनल सिलिकॉन (Silicon) तत्त्व से बनते हैं। सिलिकॉन अत्याधिक मात्रा में सामान्य बालू में होता है। पृथ्वी पर इस तत्त्व की कमी नहीं है,किन्तु इसे बालू से अलग करके इसके शुद्धिकरण की प्रक्रिया काफी जटिल और महँगी है। सिलिकॉन का शुद्धिकरण करना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि सिर्फ शुद्ध सिलिकॉन ही सौर ऊर्जा को सोखने के लिए उपयुक्त होता |

सौर ऊर्जा के द्वारा बिजली उत्पन्न का कार्य करने वाले उपकणों के समूह को सोलर सिस्टम कहते हैं| प्रायः एक सोलर सिस्टम में सोलर पैनल, इनवर्टर, सोलर पैनल स्टैंड है,और सभी चीजों को आपस में जोड़ने के लिए D C तार होते हैं| सोलर सिस्टम अलग-अलग श्रेणी में उपलब्ध होते हैं, जैसे 1 किलोवाट, 2 किलोवाट, 3 किलोवाट, 5 किलोवाट आदि |

Types of Solar Panel and Solar System

Solar Panel

Solar Panel and Solar System में सोलर पैनल सूर्य से आने वाली किरणों को direct current में परिवर्तित करता है| सोलर पैनल की कीमत लगभग पूरे सोलर सिस्टम की 40% तक होती है| Solar Panel and Solar System में 2 तरह के सोलर पैनल उपलब्ध है, जिसमें से एक है पॉलीक्रिस्टलाइन (Polycrystalline) और दूसरा है मोनोक्रिस्टलाइन (Monocrystalline)|

Polycrystalline Solar Panel

यह पैनल पुरानी तकनीकि से बने होते हैं | सोलर सेल के अंदर एक नहीं बल्कि अनेक क्रिस्टल होते हैं। ऐसे सोलर सेल बनाने की प्रक्रिया औसतन कुछ कम महँगी होती है। ऐसे पैनल को पॉलीक्रिस्टलाईन सोलर पैनल कहते हैं। एक सोलर सेल में अनेक क्रिस्टल होना एक प्रकार का दोष ही है, और इसके कारण सौर्य ऊर्जा का ग्रहण कुछ कम होता है। जो कुछ परिस्थितियों में सही ढंग से कार्य नहीं कर पाता, जैसे- बारिश के मौसम में और बादल होने पर|

Monocrystalline Solar Panel

आधुनिक तकनीक पर बने हुए हैं| शुद्ध सिलिकॉन के एक ही क्रिस्टल की पतली स्लाइस से सोलर सेल बनता है। यानी उस सोलर सेल के अंदर छोटी सी भी खामी नहीं होती । पर ऐसे अतिशय खामी-रहित सोलर सेल बनाने की प्रक्रिया भी अतिशय महँगी होती है। ऐसी सोलर सेल से बनी हुई सोलर पैनल को मोनोक्रिस्टलाईन सोलर पैनल कहते हैं। और यह सामान्य सोलर पैनल की तुलना में ज्यादा सही तरीके से काम करते हैं| यह पैनल बारिश के मौसम और बादल होने पर भी बिजली उत्पन्न करते हैं|

Solar Panel and Solar System
Monocrystalline Solar Panel VS Polycrystalline Solar Panel
मोनोक्रिस्टलाईन पैनल वाली सिस्टम लगाने के मुख्य फ़ायदे

॰ ये पैनलें ज़्यादा करंट देते हैं, इनसे बैटरी चार्ज करने में कम समय लगता है।
॰ इन पैनलों को छत पर बिठाने का खर्च कुछ कम होता है।
॰ कम रोशनी में ये पैनलें बेहतर परिणाम देते हैं।
॰ गर्मी के मौसम की इन पैनलों पर कुछ कम असर होता है।
पर मोनोक्रिस्टलाईन सोलर पैनल की कीमत पॉलीक्रिस्टलाईन सोलर पैनल से ज्यादा होती है, क्योंकि यह पैनल ज्यादा आधुनिक और महँगी तकनीक से बनते हैं।

Inverter

Solar Panel and Solar System में इनवर्टर सोलर पैनल के बाद दूसरा मुख्य भाग है, जो सोलर पैनल के द्वारा उत्पन्न हुये Direct current को Alternating current में परिवर्तित करता है| प्रायः सोलर इनवर्टर का मूल्य, सम्पूर्ण सोलर सिस्टम के 25% तक लगभग होती है|

Battery

सोलर पैनल से उत्पन्न हुई बिजली को संग्रहित करने के लिए बैटरी का प्रयोग किया जाता है क्योंकि रात्रि के समय सोलर पैनल को धूप ना मिलने के कारण सोलर पैनल काम करना बंद कर देते हैं और उस समय बिजली के लिए बैटरी की जरूरत पड़ती है| बैटरी की संग्रहण क्षमता को दर्शाने के लिए Ah का प्रयोग किया जाता है जिसमें सामान्य 150Ah, 200Ah, 220Ah अधिक लोकप्रिय है| 150Ah की बैटरी से लगभग हम 3 से 4 घंटे तक 400 वाट बिजली की वस्तुओं को काम में ले सकते हैं और लगभग पूरी रात एलईडी बल्ब और पंखा चला सकते हैं|

Solar Panel Stand

सोलर पैनल के लिए एक सही ढांचे का प्रयोग किया जाना बहुत जरूरी है क्योंकि सोलर पैनल छत पर लगाए जाते हैं और तेज हवा चलने से यह गिर कर टूट भी सकते है| इसके साथ-साथ सोलर पैनल को सही दिशा में और सही कोण में लगाने के लिए अच्छी गुणवत्ता के सोलर स्ट्रक्चर या ढांचे की आवश्यकता होती है |

Types of Solar System

विद्युत उत्पादन के लिए सोलर सिस्टम दो प्रकार के होते हैं

ऑफ ग्रिड सोलर सिस्टम :

Solar Panels, Solar Battery, Solar PCU होगा जो MPPT टेक्नोलॉजी से बना होगा , Solar Panel Stand, ACDB / DCDB बॉक्स, लाइटिंग अरेस्टर, 2 core DC wire आदि |
यह सिस्टम ज्यादातर ग्रामीण इलाकों , अधिक बिजली कटौती वाले जगहों या जहाँ बिजली की उपलब्धता न हो वहाँ प्रयोग किए जाते हैं | इस सिस्टम में बैकअप ले लिए आवश्यकतानुसार बैटरियाँ लगी होती हैं |

Solar Panel and Solar System
Solar Panel and Solar System
ऑन ग्रिड सोलर सिस्टम :

Single Phase होता है इसलिए Net Meter भी सिंगल फेज होता है | ऑन ग्रिड सोलर सिस्टम लगाने से पहले अपने घर का Existing Sanctioned Load लोड जरूर चेक कर ले, क्योंकि Existing Load का 80% सोलर लगा सकते है |
ये सोलर सिस्टम वहाँ लगाया जाता है , जहाँ बिजली हमेशा उपलब्ध हो और महीने का बिजली का बिल ज्यादा आता हो | ये क्षेत्र है हर State के Metro Cities , यहाँ के घरों में गर्मी के मौसम के लिए Air Conditioner और ठंडी के के मौसम के लिए Water Geysers घरो में लगा होगा।

इस सिस्टम में बैकअप के लिए battery नहीं होती है | जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है ऑन ग्रिड सोलर सिस्टम अतः यह ग्रिड से ही operate होता है |

Subsidy on Solar System

घरों में सिर्फ On Grid Solar System लगवाने पर सरकार द्वारा सब्सिडी दी जाती है, ऑफ ग्रिड सोलर सिस्टम पर नहीं | सब्सिडी पाने के लिए आपको अपने क्षेत्र में रजिस्टर्ड कम्पनी के Registered Empanelled Agencies, Firms, Installer, Manufacturer से लगवाना होगा । भारत सरकार द्वारा सोलर सिस्टम पर 20% से 40% तक सब्सिडी दी जाती है| 1 किलो वाट से 3 किलो वाट तक के सोलर सिस्टम पर सरकार द्वारा 40% की सब्सिडी और 4 किलो वाट से लगाकर 10 किलो वाट के सोलर सिस्टम पर 20% की सब्सिडी का प्रावधान है|

सब्सिडी सिर्फ घरों में सोलर पैनल लगने पर ही दी जाता है | सब्सिडी स्कीम के तहत सोलर पैनल लगाने के लिए अपने क्षेत्र के Electricity Department से प्रमाणित कम्पनी से ही लगवाना पड़ता है | इसके लिए आपको अपने क्षेत्र के State Renewable Energy Website पर अप्लाई करना होगा, जैसे कि उत्तर प्रदेश का UPDNEDA, पंजाब का PEDA, हरियाणा का HAREDA, केरला का KSEB, बिहार का BAREDA, झारखण्ड का JHAREDA, etc.

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