Semiconductor | Attractive for electronics

अर्धचालक(Semiconductor)

Semiconductor वे पदार्थ हैं, जिनकी विद्युत चालकता चालकों से कम कुचालकों से अधिक होती है। सिलिकॉन, जर्मेनियम, कैडमियम सल्फाइड, गैलियम आर्सेनाइड आदि अर्धचालक पदार्थ हैं।

अर्धचालकों में चालन बैण्ड और संयोजक बैण्ड के बीच एक ‘बैण्ड गैप’ होता है, जिसका मान 0 से 6 इलेक्ट्रान-वोल्ट के बीच होता है। (Ge 0.7 eV, Si 1.1 eV, GaAs 1.4 eV, GaN 3.4 eV, AlN 6.2 eV)। इलेक्ट्रानिक युक्तियाँ बनाने के लिए प्रयोग किए जाने वाले अधिकांश अर्धचालक आवर्त सारणी के समूह IV के तत्व (जैसे सिलिकॉन, जर्मेनियम), समूह III और V के यौगिक (जैसे, गैलियम आर्सेनाइड, गैलियम नाइट्राइड, इण्डियम एण्टीमोनाइड), या समूह II और VI के यौगिक (कैडमियम टेलुराइड) हैं।

अर्धचालक पदार्थ एकल क्रिस्टल के रूप में हो सकते हैं या बहुक्रिस्टली पाउडर के रूप में हो सकते हैं। वर्तमान समय में organic semiconductors भी बनाए जा चुके हैं,जो प्रायः बहुचक्री एरोमटिक यौगिक होते हैं। आधुनिक युग में प्रयुक्त तरह-तरह की devices के मूल में ये अर्धचालक पदार्थ ही हैं। इन्ही से पहले डायोड बनाया गया और फिर ट्रांजिस्टर। इसी आधार पर इलेक्ट्रानिक युग की शुरूआत हुई। विद्युत और इलेक्ट्रानिकी में इनकी बहुत बड़ी भूमिका रही है। विज्ञान की जिस शाखा में अर्धचालकों का अध्ययन किया जाता है उसे ठोस अवस्था भौतिकी कहते हैं।

ताप बढ़ाने पर अर्धचालकों की विद्युत चालकता बढ़ती है, यह गुण चालकों के उल्टा है। अर्धचालकों में बहुत से अन्य उपयोगी गुण भी देखने को मिलते हैं, जैसे किसी एक दिशा में दूसरे दिशा की अपेक्षा आसानी से धारा प्रवाह (अर्थात् भिन्न-भिन्न दिशाओं में विद्युतचालकता का भिन्न-भिन्न होना)। इसके अलावा नियंत्रित मात्रा में अशुद्धियाँ डालकर (एक करोड़ में एक भाग या इससे मिलता-जुलता) अर्धचालकों की चालकता को कम या अधिक बनाया जा सकता है। इन अशुद्धियों को मिलाने की प्रक्रिया को doping कहते हैं। डोपिंग करके ही इलेक्ट्रानिक युक्तियों (डायोड, ट्रांजिस्टर, आईसी आदि) का निर्माण किया जाता है।

ऊर्जा बैंड धारणा के अनुसार कमरे के ताप पर Semiconductor पदार्थ वे हैं जिनके:
चालन व संयोजी बैंड आंशिक रूप से भरे हुए हो।
जिनके मध्य का Forbidden energy band काफी संकरा लगभग एक इलेक्ट्रॉन वोल्ट की कोटि का हो, जैसे- जर्मेनियम के लिए यह 0.75 इलेक्ट्रॉन वोल्ट तथा सिलिकॉन के लिए लगभग 1.12 इलेक्ट्रॉन वोल्ट की कोटि का होता है।

Semiconductor के विशेष गुण

ताप बढ़ाने पर अर्धचालकों की विद्युत चालकता बढ़ती है, इस कारण ही अर्धचालकों का प्रतिरोध ताप गुणांक ऋणात्मक होता है।
अर्धचालकों में बहुत से अन्य उपयोगी गुण भी देखने को मिलते हैं, जैसे किसी एक दिशा में दूसरे दिशा की अपेक्षा आसानी से धारा का प्रवाह होना अर्थात् भिन्न-भिन्न दिशाओं में विद्युतचालकता का भिन्न-भिन्न होना।
इसके अलावा नियंत्रित मात्रा में अशुद्धियाँ डालकर अर्धचालकों की चालकता को कम या अधिक किया जा सकता है।
इन अशुद्धियों को मिलाने की प्रक्रिया को doping कहते हैं। डोपिंग करके ही इलेक्ट्रानिक युक्तियों (डायोड, ट्रांजिस्टर आदि) का निर्माण किया जाता है।इनकी चालकता को बाहर से लगाए गए विद्युत क्षेत्र या प्रकाश के द्वारा भी परिवर्तित किया जा सकता है।

अर्धचालक के प्रकार

अर्धचालक दो प्रकार के होते हैं

Intrinsic Semiconductor :

अर्धचालक जिसमें कोई भी अशुद्धियां या अपद्रव्य ना मिला हो उसे Intrinsic Semiconductor कहते हैं। इस प्रकार शुद्ध जर्मेनियम तथा सिलिकॉन अपनी प्राकृतिक अवस्था में निज अर्धचालक हैं।

Extrinsic Semiconductor :

Intrinsic Semiconductor की वैद्युत चालकता बहुत कम होती है। परंतु यदि किसी ऐसे पदार्थ को बहुत थोड़ी सी मात्रा, जिसकी संयोजकता 5 अथवा 3 हो, शुद्ध जर्मेनियम अथवा सिलिकॉन क्रिस्टल में अशुद्धि के रूप में मिश्रित कर दे तो क्रिस्टल की चालकता काफी बढ़ जाती है। मिश्रित करने की प्रक्रिया को Doping कहते हैं। ऐसे अशुद्ध अर्धचालक को Extrinsic Semiconductor कहते हैं।

बाह्य अर्धचालक दो प्रकार के होते हैं

n-type Semiconductor :

जब किसी जर्मेनियम अथवा सिलिकॉन क्रिस्टल में पांच संयोजकता वाला अपद्रव्य परमाणु मिलाया जाता है तो वह जर्मेनियम के एक परमाणु को हटाकर उसका स्थान ले लेता है।

अपद्रव्य परमाणु के पांच संयोजक इलेक्ट्रानों में से 4 इलेक्ट्रान अपने चारों ओर स्थित जर्मेनियम के चार परमाणुओं के एक-एक संयोजक इलेक्ट्रॉन के साथ सहसंयोजक बंध बना लेते हैं। 5 वां संयोजक इलेक्ट्रॉन अपद्रव्य के परमाणु से अलग हो जाता है तथा क्रिस्टल के भीतर मुक्त रूप से चलने लगता है।

यही इलेक्ट्रान और आवेश वाहक का कार्य करते है। इस प्रकार शुद्ध जर्मेनियम में अपद्रव्य मिलाने से मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ जाती है अर्थात क्रिस्टल की चालकता बढ़ जाती है।

इस प्रकार के अशुद्ध जर्मेनियम क्रिस्टल को n-टाइप अर्धचालक कहते हैं क्योंकि इसमें आवेश वाहक (मुक्त इलेक्ट्रॉन) ऋणात्मक होते हैं। अपद्रव्य परमाणुओं को दाता परमाणु कहते हैं, क्योंकि ये क्रिस्टल को चालक इलेक्ट्रॉन प्रदान करते हैं।

Semiconductor

p-type Semiconductor :

यदि जर्मेनियम अथवा सिलिकॉन क्रिस्टल में तीन संयोजकता वाला अपद्रव्य परमाणु को मिलाया जाए तो यह भी एक जर्मेनियम परमाणु का स्थान ले लेता है। इसके तीन संयोजक इलेक्ट्रॉन तीन निकटतम जर्मेनियम परमाणुओं के एक-एक संयोजक इलेक्ट्रॉन के साथ मिलकर सहसंयोजक बंध बना लेते हैं।

जबकि जर्मेनियम का चौथा संयोजक इलेक्ट्रॉन बंध नहीं बना पाता। अतः क्रिस्टल में अपद्रव्य परमाणु के एक ओर रिक्त स्थान रह जाता है जिसे कोटर (Hole) कहते हैं।

बाह्य वैद्युत क्षेत्र लगाने पर कोटर में पड़ोसी जर्मेनियम परमाणु से बंधा हुआ एक इलेक्ट्रॉन आ जाता है जिससे पड़ोसी परमाणु में एक स्थान रिक्त होकर कोटर बन जाता है।

इस प्रकार कोटर क्रिस्टल के भीतर एक स्थान से दूसरे स्थान पर विद्युत क्षेत्र की विपरीत दिशा में चलने लगता है। स्पष्ट है कि कोटर धनावेशित कण के तुल्य जो इलेक्ट्रॉन के सापेक्ष विपरीत दिशा में चलता है।

इस प्रकार के अपद्रव्य मिले जर्मेनियम क्रिस्टल को p-टाइप अर्धचालक कहते हैं क्योंकि इसमें आवेश वाहक धनात्मक होते हैं। अपद्रव्य परमाणुओं को ग्राही परमाणु कहते हैं क्योंकि वह शुद्ध अर्धचालक से इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करते है।

Semiconductor

अर्धचालक के उदाहरण, युक्ति :

p-n junction diode

p-n संधि डायोड एक मूल अर्धचालक युक्ति है। यह एक अर्धचालक क्रिस्टल होता है जिसके एक क्षेत्र में ग्राही अपद्रव्य की अधिकता तथा दूसरे क्षेत्र में दाता अपद्रव्यों की अधिकता होती है। इन क्षेत्रों को क्रमशः p-क्षेत्र तथा n-क्षेत्र कहते हैं तथा इन क्षेत्रों के बीच परिसीमा को p-n संधि कहते हैं।

Light Emitting Diodes

एक ऐसी युक्ति है जो बायसिंग बैटरी की विद्युतीय ऊर्जा का विकिरण ऊर्जा में परिवर्तन करती है। यह एक p-n संधि है जो सामान्य p-n संधियों से अधिक अपमिश्रित होती है।

इसका प्रयोग चोर सूचक घंटी बनाने, प्रकाशीय कंप्यूटर मेमोरी में सूचना प्रवेश के लिए, कंप्यूटर तथा कैलकुलेटर के अंक व शब्द प्रदर्शन में तथा टेलीविजन के रिमोट कंट्रोल में भी किया जाता है।

फोटो डायोड

यह एक ऐसी युक्ति है जो प्रकाशीय संकेतों के संसूचन में प्रयोग की जाती है। फोटो डायोड एक प्रकाश संवेदनशील अर्धचालक से बनी ऐसी p-n संधि है जो कि संधि पर आपतित प्रकाश के प्रभाव पर आधारित हैं।

इस डायोड का उपयोग प्रकाश संचालित switch, कम्प्यूटर पंचकार्डों आदि को पढ़ने में किया जाता है।

ट्रांजिस्टर

यह p व n प्रकार के अर्धचालकों से बनी एक ऐसी इलेक्ट्रॉनिक युक्ति है जो ट्रायोड वाल्व के स्थान पर प्रयोग की जाती है। ट्रांजिस्टर का उपयोग अनेक प्रकार से होता है।

इसे प्रवर्धक, स्विच, वोल्टेज नियामक (रेगुलेटर), संकेत न्यूनाधिक (सिग्नल माडुलेटर), आसिलेटर आदि के रूप में काम में लिया जाता है।

Semiconductor उपकरणों के लाभ

चूंकि अर्धचालक उपकरणों में कोई फिलामेंट नहीं होता है, इसलिए इलेक्ट्रॉनों के उत्सर्जन के कारण उन्हें गर्म करने के लिए कोई शक्ति की आवश्यकता नहीं होती है।
किसी हीटिंग की आवश्यकता न होने कारण सर्किट चालू होते ही अर्धचालक उपकरण तुरंत कार्य करना शुरू कर देते हैं।
वैक्यूम ट्यूबों की तुलना में अर्धचालक उपकरणों को कम वोल्टेज ऑपरेशन की आवश्यकता होती है।
वैक्यूम ट्यूबों की तुलना में सेमीकंडक्टर डिवाइस सस्ते हैं। अर्धचालक उपकरणों का लगभग असीमित जीवन है।

Semiconductor उपकरणों के नुकसान

वैक्यूम ट्यूबों की तुलना में अर्धचालक उपकरणों में शोर का स्तर अधिक है।
साधारण अर्धचालक उपकरण, वैक्यूम ट्यूबों की तुलना में अधिक शक्ति सहन नहीं कर सकते।

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