Resistance based on Resistor | Let’s know now

Resistance

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Resistance रेसिस्टर का एक गुण है,करंट के मार्ग में बाधा उत्पन करने वाले को ही रेसिस्टेन्स कहते है| इसको R से प्रदर्शित करते है, इसका मात्रक Ω है| किसी चालक की चौड़ाई बढने पर रेसिस्टेन्स कम होता है,और लम्बाई बढ़ने पर रेसिस्टेन्स बढ़ता हैं| अतः एम्पियर मुक्त इलेक्ट्रान का प्रवाह और प्रतिरोध पदार्थ द्वारा किया गया विरोध है, जो इन इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह में बाधा डालता है| वैसे पदार्थ में विद्यमान परमाणु और अणु ही इन इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह में बाधा डालते हैं |

Resistance

परिभाषा :

“किसी Circuit में हो रहे Current Flow में रुकावट, Resistance कहलाता है” | Resistance और Resistor में अंतर इतना है कि Resistance एक राशि है और Resistor, Resistance पैदा करने वाली device होती है| हिन्दी में इन दोनों का अर्थ प्रतिरोध ही है | प्रतिरोध का उपयोग धारा को नियंत्रित या कम करने में किया जाता है|

Series Resistance
विद्युत प्रवाह वहन करने वाला वाहक के सीरीज में जो अवरोध उत्पन्न करता है, उसे सीरीज Resistance कहते है |

Parallel Resistance
विद्युत प्रवाह वहन करने वाला वाहक के समांतर में जो अवरोध उत्पन्न करता हे उसे पैरेलल Resistance कहते हैं |

Resistance Formula

R=V/I
जहाँ : R – रेजिस्टेंस,V – वोल्टेज,I – धारा

Resistivity की निर्भरता

॰ एक कंडक्टर का प्रतिरोध R इसकी लंबाई के लिए सीधे आनुपातिक है|

R ∝ L

जहाँ : R- Resistance, L- Length

॰ कंडक्टर के क्रोस -सेक्शन क्षेत्र के विपरीत यानी आनुपातिक (inversely proportional) है|

R= p(L/A)Ω

जहाँ: R- Resistance, p-Resistivity of the conductor, L-Length of the conductor, A-Cross section Area.

॰ पदार्थ की प्रकृति पर निर्भर करता है।
॰ तापमान पर निर्भर करता है।

Conductor-विद्युत धारा के कम विरोध करने वाले पदार्थ

कुछ पदार्थ धातुएँ जैसे चाँदी,तांबा,एल्युमिनाईन आदि| विद्युत प्रवाह के फ्लो (मुक्त इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह) को बहुत कम विरोध की पेशकश करते हैं, कंडक्टर कहलाते हैं|
धातुओं और मिश्र धातुओं की प्रतिरोधकता बहुत कम है, इसलिए ये विद्युत प्रवाह के अच्छे चालक होते हैं।

Non-Conductor- विद्युत धारा के ज्यादा विरोध करने वाले पदार्थ

वे पदार्थ जो विद्युत प्रवाह के फ्लो (मुक्त इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह) का उच्च विरोध करते हैं। जिसमे कांच,रबर,अभ्रक,सूखी लकड़ी आदि विद्युत के आवाहक कहलाते हैं | इन्सुलेटरों की प्रतिरोधकता अत्यधिक विशाल है| इसीलिए यह शायद ही किसी भी प्रवाह का संचालन करते है|

अतः प्रतिरोध पदार्थ द्वारा उत्पन होने वाला विद्युत घर्षण है, जो विद्युत प्रवाह के फ्लो के साथ गर्मी का उत्पादन करता है |

प्रतिरोध के प्रकार

Resistor मुख्यतः दो प्रकार के होते है-

Fixed Resistor जिसका Resistance Fix रहता है |
Variable Resistor जिसका Resistance कम ज्यादा कर सकते है |

Fixed Resistor या साधारण प्रतिरोध

फिक्स्ड रेसिस्टर एक प्रकार के लीनियर रेसिस्टर होते हैं| फिक्स्ड रेसिस्टर्स उस रेसिस्टर को कहा जाता है, जिन का मान फिक्स होता है| फिक्स्ड रेसिस्टर का मान वेरिएबल रेसिस्टर की तरह बदला नहीं जा सकता | ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि फिक्स्ड रेसिस्टर्स के मान को इसको बनाते समय निर्धारित कर दिया जाता है|
Fixed Resistor यानि Simple प्रतिरोध जो किसी भी Circuit में इसका फिक्स मान होता है, जहाँ पर फिक्स resistance की जरूरत पड़ती है इसे Use करते है|

फिक्स्ड रेसिस्टर के प्रकार

कार्बन कंपोजिशन रेसिस्टर

यह रेसिस्टर काफी आम है| इस तरह के रेसिस्टर को बनाना काफी आसान रहता है,और इनकी कीमत भी काफी कम रहती है| कार्बन कंपोजिशन रेसिस्टर मुख्यतः कार्बन क्ले से बने होते हैं, जिनको प्लास्टिक के कवर से ढका जाता है| इस रेसिस्टर की लेड टीन वाले तांबे से बनी होती है| इस तरह के रेसिस्टर का इस्तेमाल करने का मुख्य लाभ यह है कि यह काफी आसानी से मिल जाते हैं, और यह बहुत टिकाऊ भी होते हैं|

कार्बन कंपोजिशन रेसिस्टर को इस्तेमाल करने का यह नुकसान है कि यह तापमान के प्रति काफी संवेदनशील होते हैं| इस तरह के रेसिस्टर में विद्युत करंट एक कार्बन पार्टिकल से दूसरे कार्बन पार्टिकल की तरफ बढ़ता है जिस वजह से यह कुछ विद्युत शोर भी उत्पन्न करते हैं |

कार्बन कंपोजिशन रेसिस्टर का उपयोग

कार्बन कंपोजिशन रेसिस्टर का उपयोग हाई फ्रीक्वेंसी एप्लीकेशंस में किया जाता है|
इसका इस्तेमाल हाई वोल्टेज पावर सप्लाई में किया जाता है|
इसका उपयोग करंट लिमिटिंग सर्किट में किया जाता है|

वायर वाउंड रेसिस्टर

वायर वाउंड रेसिस्टर में मैंगनीन या कांसटेनटन की तार को इंसुलेटिंग मटेरियल के एक सिलेंडर के आसपास लपेट दिया जाता है| मैंगनीन और कांसटेनटन का तापमान गुणांक 0 रहता है जिस वजह से इन रेसिस्टर में तापमान के साथ रेसिस्टेंस परिवर्तन ना के बराबर होता है| इन रेसिस्टर की कीमत कार्बन रेसिस्टर से काफी अधिक रहती है| इन रेसिस्टर का प्रयोग उस समय किया जाता है जब कार्बन कंपोजिशन रेसिस्टर अपने सीमाओं की वजह से वह काम नहीं कर पाता |

वायर वाउंड रेसिस्टर का उपयोग

इस रेसिस्टर का इस्तेमाल स्पेस और डिफेंस के कार्यों में किया जाता है |
इसको वोल्टेज और करंट को बैलेंस करने के लिए इस्तेमाल में लिया जाता है |
इस रेसिस्टर का इस्तेमाल कंप्यूटर में भी किया जाता है |

थिक और थिन फिल्म रेसिस्टर

फिल्म रेसिस्टर के सेरेमिक बेस पर एक प्रतिरोधक परत चढ़ी होती है, जिसकी मोटाई से यह आकलन होता है कि ये रेसिस्टर थिक फिल्म रेसिस्टर है या थिन फिल्म रेसिस्टर है| थिक फिल्म रेसिस्टर के प्रतिरोधक परत की मोटाई थिन फिल्म रेसिस्टर के प्रतिरोधक परत की मोटाई से काफी अधिक होती है| थिक फिल्म रेसिस्टर का उत्पादन एक खास पेस्ट के जरिए किया जाता है, जो कि ग्लास और धातु ऑक्साइड का सबस्ट्रेट में मिश्रण होता है | थिक फिल्म रेसिस्टर तीन प्रकार के होते हैं,फ्युजिबल रेसिस्ट, सेरमेट फिल्म रेसिस्टर और मेटल ऑक्साइड फिल्म रेसिस्टर |

Variable Resistor

हमारी जरुरत के मुताबित जिसको हम कम या ज्यादा कर सके उसको परिवर्ती प्रतिरोधक कहते हैं | जिसमे पोटेंशियोमीटर, रिओस्टेट और ट्रिमर जैसे प्रकार आते हैं |

इस तरह के resistor Resistance को adjust कर सकते है अर्थात कम ज्यादा कर सकते है इसके लिए इनकी knob को rotate करना होता है| पुराने रेडियो और टेलिविजन में Volume कम-ज्यादा करने के लिए प्रयोग किया होगा इस प्रकार के Resistor का Resistance max-min लिमिट में आता है |

वेरिएबल रेसिस्टर एक ऐसा उपकरण होता है जिसके रेसिस्टेंस को इलेक्ट्रॉनिक सर्किट में अपनी जरूरत के अनुसार कम ज्यादा किया जा सकता है | इसका उपयोग 2 टर्मिनल के साथ-साथ 3 टर्मिनल के तौर पर भी किया जा सकता है| मुख्यतः इसको 3 टर्मिनल के तौर पर इस्तेमाल में लिया जाता है| वेरिएबल रेसिस्टर का उपयोग उपकरण के अंशाकन के लिए किया जाता है |

वेरिएबल रेसिस्टर के प्रकार

पोटेंशियोमीटर

जब कभी हम करंट और पोटेंशियल अंतर का आकलन एमीटर या वोल्टमीटर से करते हैं, उस समय हमारे पास शुद्ध मान नहीं आ पाता है | क्योंकि जब हम एमिटर या वोल्ट मीटर को सर्किट में जोड़ते हैं, तब वह मूल सर्किट को डिस्टर्ब कर देता है |लेकिन पोटेंशियोमीटर एक ऐसा उपकरण होता है, जिसके मदद से हम करंट और पोटेंशियल डिफरेंस का आंकलन बिल्कुल सटीक ढंग से कर सकते हैं | पोटेंशियोमीटर एक ऐसा रेसिस्टर है, जो कि किसी सर्किट में वोल्टेज को काबू करने के काम में लिया जाता है|

पोटेंशियोमीटर 3 टर्मिनल से निर्मित होता है, जिसमें दो टर्मिनल निश्चित होते हैं तो एक टर्मिनल परिवर्तनशील होता है| पोटेंशियोमीटर के 2 निश्चित टर्मिनल को रजिस्टर मटेरियल के दोनों सिरों से जोड़ दिया जाता है| जिसको ट्रैक कहा जाता है, और तीसरे टर्मिनल को एक स्लाइडर से जोड़ दिया जाता है जिसको वाइपर कहा जाता है | जैसे ही वाइपर रेसिस्टेंस के पथ पर चलता है उसी समय पोटेंशियोमीटर के रेसिस्टेंस मे बदलाव आना शुरू हो जाता है |

पोटेंशियोमीटर का इस्तेमाल

पोटेंशियोमीटर का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक सर्किट में वोल्टेज डिवाइडर के तौर पर किया जाता है|
पोटेंशियोमीटर रेडियो और टेलीविजन मे आवाज को कम ज्यादा करने के लिए काम में लिया जाता है|
इसका इस्तेमाल मेडिकल उपकरणों में भी किया जाता है|

रिओस्टेट

रिओस्टेट शब्द ग्रीक शब्द रियोस और स्टैटिस से बना है, इसका मतलब होता है करंट को काबू में करने वाला उपकरण | रिओस्टेट का निर्माण पोटेंशियोमीटर की तरह ही होता है| पोटेंशियोमीटर की तरह रिओस्टेट मे भी 3 टर्मिनल मौजूद होते हैं, हालांकि इसमें ऑपरेशन करने के लिए केवल दो टर्मिनल को उपयोग में लिया जाता है| रिओस्टेट का रेसिस्टेंस प्रतिरोधक तत्व पर निर्भर करता है जिसके माध्यम से इलेक्ट्रिक करंट दौड़ रहा हो |

रिओस्टेट का उपयोग

रिओस्टेट उन उपकरणो में इस्तेमाल किया जाता है जहां हाई वोल्टेज और करंट की जरूरत हो |
प्रकाश की तीव्रता को बदलने के लिए रियोस्टेट का उपयोग डिम रोशनी में किया जाता है |
अगर हम रिओस्टेट के रेसिस्टेंस को बढ़ाते हैं तो लाइट बल्ब में प्रवाहित हो रहा इलेक्ट्रिक करंट कम हो जाता है| जिस वजह से प्रकाश की चमक कम हो जाती है|

थर्मिस्टर

थर्मिस्टर शब्द का अर्थ है थर्मल रेसिस्टर| इस प्रकार के रेसिस्टर का मान तापमान के अनुसार परिवर्तित होता रहता है| अधिकांश थर्मिस्टर में नकारात्मक तापमान गुणांक होता है, जिसका मतलब यह है कि तापमान बढ़ने के साथ-साथ इसका रेसिस्टेंस नीचे की ओर गिर जाएगा | थर्मिस्टर सेमीकंडक्टर मैटेरियल से निर्मित होते हैं| थर्मिस्टर्स की मदद से कुछ मेगाओम तक का रेसिस्टेंस प्राप्त किया जा सकता है | थर्मिस्टर का इस्तेमाल छोटे से छोटे तापमान मे हुए परिवर्तन को मापने के लिए किया जाता है|

थर्मिस्टर का उपयोग

थर्मिस्टर का उपयोग विनिर्माण सुविधाओं में सर्किट ब्रेकर के तौर पर किया जाता है अगर तापमान खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है तब थर्मिस्टर की मदद से सर्किट को तोड़ दिया जाता है|
थर्मिस्टर का उपयोग अक्सर थर्मामीटर में किया जाता है क्योंकि यह तेजी से प्रक्रिया करते हैं और साथ ही साथ यह काफी सटीक भी होते हैं|

Resistance को मापने की विधियाँ

किसी भी Resistor का Resistance मापने के लिए Ohm के नियम का use कर सकते है या फिर Color code सबसे बड़िया Option है या फिर Multi meter का use करके किसी भी resistor का resistance माप सकते है resistor पर कई कलर की पट्टियाँ होंगी इन्ही पर कलर code का use कर सकते है|

प्रतिरोध को मापने के लिए स्थिति के अनुसार अलग-अलग विधियों का उपयोग होता है –
प्रतिरोध का कलर कोड पढ़कर – कलर कोड पढ़कर हम किसी रजिस्टर का रजिस्टेंस जान सकते हैं |
मल्टीमीटर से resistance चेक करें – मल्टीमीटर के उपयोग से भी हम किसी रजिस्टर का रजिस्टेंस पता कर सकते हैं आपको प्रतिरोध के दोनों टर्मिनलों को मल्टीमीटर के टर्मिनल से मिलाना है और मल्टी मीटर की डिस्प्ले पर आपको रजिस्टर का रजिस्टेंस दिख जाएगा |

ओम के नियम से – जब किसी विद्युत परिपथ में धारा और वोल्टेज दिया हो तब हम ओम के नियम का उपयोग करके रेजिस्टेंस ज्ञात कर सकते हैं |

किसी Resistor के Resistance पर Temperature का प्रभाव

किसी Resistor का Resistance ताप बढ़ने पर बढ़ जाता है यदि हम मान लें की Resistor का Resistance R1 है और उसका temperature T1 है फिर उसका तापमान T2 हो जाता है तब Resistance बड कर R2 हो जाता है तब R2- R₂=R₁(1+alpha(T₂-T₁)) हो जायेगा जहाँ पर alpha temperature coefficient है|

प्रतिरोधों के उपयोग

एक घटक जिसका सर्किट में फंक्शन प्रतिरोध का एक निर्दिष्ट अवरोध करनेवाला मूल्य प्रदान करना है| जिसका मुख्य use करंट और वोल्टेज को सीमित करने के लिए हैं|

कुछ स्थानों में गर्मी उत्पन्न करने के लिए किया जाता हैं| आमतौर पर बिजली और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट में प्रतिरोधों का use किया जाता है|

VFD में मोटर की स्पीड बदलने के लिए पोटेंशियोमीटर का use किया जाता है | रेडिओ में वैल्यूम नियंत्रण, ऑटोमोबाइल में डैश रोशनी के लिए डायमर नियंत्रण और HT लाइन पर इन्सुलेटर आदि जगह पे इस्तेमाल किया जाता है |

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