Relay is 1 best electrical switch

Relay

Relay एक electrical switch है जो पहले से निर्धारित Power Supply मिलने पर खुद ही on हो जाता है और supply कटने पर खुद ही off भी हो जाता है। रिले में एक विद्युत चुंबक होता है जो power source से जुड़ा होता है तथा विद्युत चुंबक की सहायता से किसी अन्य एक या एक से अधिक सर्किट को ऑन या ऑफ कर सकता है।

उदाहरण – Thermal overload relay, इस Relay का उपयोग AC Motors की सुरक्षा के लिए किया जाता है। जब Motor overload हो तो ये Relay मोटर को Supply से Disconnect कर देती है। और Motor जलने से बच जाती है।
रिले उचित volt की supply मिलने के बाद automatic कार्य करता है।

विभिन्न तरह के काम करने के लिए विभिन्न value के volts की जरूरत होती है, इसलिए किसी विशेष value के power supply का रिले न बनाकर अलग-अलग value के power supply का relay बनाया जाता है।

Relay के कार्य करने का तरीका

Relay का काम करने का तरीका बहुत आसान है Relay में सामान्यतः एक Coil लगी होती है जो इसमें लगे Normal Contact को Normal Open में बदल देती है जब Relay Off होगी तब Common Terminal सीधा NC Contact से जुड़ जाता है। आपने Common Terminal पर कोई Supply दी तो वह सीधे NC Contact पर जाएगा But जैसे ही हम Relay की Coil को apply करेंगे तो यह Coil active हो जाती है और Armature को अपनी तरफ खींच लेती है। जिससे कि Common Terminal अब NC Contact से हटकर NO Contact से जुड़ जाएगा लेकिन जैसे ही Relay की Supply बंद करेंगे तब इसमें लगा Spring वापिस आर्मेचर को अपनी तरफ खींच लेगा और again Common Terminal NC Contact से Connect हो जाता है।

Relay के Parts

Relay को Fast Switching करनें के लिए उसके Part का सही से काम करना जरूरी है। Relay के 5 Components or elements होते हैं –

Relay
Relay

Coil – किसी भी relay का value वास्तव में सिर्फ उसके क्वाइल से ही होता है और सारा काम सिर्फ coil ही करता है। relay में coil अन्दर में लगा होता है जिस वजह से ये दिखाई नहीं देता है। इस coil से 2 connection pin निकला होता है जिसमें supply दिया जाता है। जैसे ही coil में supply दिया जाता है तो वहां magnetic field बन जाता है जिस वजह से रिले का दोलन अपने जगह से हिल जाता है और रिले off/on हो जाता है।

Yoke – रिले के बाहरी Plastic भाग को योक कहते हैं।

Contact – Switching के समय NO , NC के रूप में Contact का प्रयोग किया जाता है।

Armature – रिले के अंदर Common Terminal से जुड़ा होता है। जो Common Terminal को NC Contact और NO Contact से जोड़ने का काम करता है।

Spring – रिले के अंदर Spring का अपना अलग अलग स्थान होता है। जब रिले की कुंडली को Supply मिलती है तब आर्मेचर NO से Connect हो जाता है। तथा कुंडली की Supply काटने के बाद Spring आर्मेचर को खींचकर NC से Connect कर देती है।

रिले निम्नलिखित 2 group में work करता है।

1) Input Power Supply Group
रिले के input वाले भाग में उचित मान का supply दिया जाता है जिससे रिले काम करता है। किसी भी रिले के coil से जो 2 connection pin बाहर निकाला जाता है उसी में power supply दिया जाता है। इस ग्रुप में coil और कोर का नाम आता है।

2) Switch Group
जब रिले में power सप्लाई दिया जाता है तो इसका दोलन हिल जाता है जिससे रिले on/off होता है। तो इस process में जितने भी componants काम करते हैं वो रिले के switch वाले group में आते हैं। दोलन इसी group में आता है क्योंकि स्विच का काम यही करता है।

Relay के प्रकार

Relay सामान्यतः दो प्रकार की होती है

Latching relay
ये वह रिले है जिसे हम विद्युत Supply करके Activate करते हैं। उसके बाद जिसे जिस Position पर चली जाती है। उसके बाद रिले को अगर डीएक्टिवेट यानी कि विद्युत ना दिया जाए तो भी उसकी पोजीशन चेंज नहीं होती यानि कि उसकी पोजीशन वहीं पर रुक जाती है जहां से उसे विद्युत देकर एक्टिवेट किया था विद्युत ना देने के बाद भी उसकी पोजीशन वापस उसी जगह पर नहीं आती है

Non – Latching relay
ये वह रिले है। जिसे विद्युत देने और ना देनें से उनकी Position बदलती रहती है।

कुछ अन्य प्रकार के relay
अलग-अलग सर्किट के जरूरत को ध्यान में रखते हुए रिले को अलग-अलग designing में बनाया जाता है लेकिन उनके काम में कोई परिवर्तन नहीं आता है। काम करने के आधार पर रिले निम्न हैं।

(1) Passing current
किसी भी रिले के switch वाले group से maximum कितना current पास किया जा सकता है, इस आधार पर ये विभिन्न ampere में बनाया जाता है। किसी भी Relay का passing current जितना ज्यादा होगा वो रिले size में उतना ज्यादा बड़ा और ज्यादा costly होगा।

मान लेते हैं कि 5 ampere और 10 ampere का 2 रिले है। तो यहाँ 5 एम्पियर वाले रिले से अधिकतम 5 एम्पीयर current को ही cross किया जा सकता है। यदि इस रिले से 5 से ज्यादा ampere का करेंट cross किया जायेगा तो relay जल जायेगा। लेकिन वहीँ 10 ampere वाले रिले से 10 ampere तक का current पास किया जा सकता है।
एक बात का ख़ास ध्यान रहे कि 5 ampere वाले रिले के जगह पर 10 ampere वाले रिले का इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन 10 ampere वाले रिले के जगह पर 5 ampere के रिले का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

(2) One-Way Relay
जिस तरह से आप अपने electric board में लगे स्विच को on करते हैं तो bulb जलता है और switch को off करते हैं तो bulb बुझ जाता है, ठीक उसी तरह से एक one-way रिले भी काम करता है। इस रिले में 4 connection pin होते हैं। 2 pin power के लिए होते हैं और बाकी के 2 पिन switching के काम के लिए होते हैं।

(3) Two-Way Relay
मान लेते हैं कि हमारे पास एक पंखा और एक बल्ब है। हमें इसे electric तरीके से रिले के द्वारा इस तरह से on/off करना है कि रिले के on रहने पर पंखा काम करे लेकिन बल्ब काम नहीं करे और off रहने पर bulb काम करे लेकिन पंखा काम नहीं करे। तो इस तरह के काम के लिए two-way relay का प्रयोग किया जायेगा।

इस रिले में 5 connection pin होते हैं। 2 पिन तो power supply के लिए ही होते हैं लेकिन बाकी के 3 pin switching के लिए होते हैं जिसमें से एक pin को common रखा जाता है। नीचे के image में आप इस रिले के कार्य-विधि को समझ सकते हैं।

(4) Two Poles One Way Relay
माना कि आपके पास एक ac बल्ब और एक dc बल्ब है जिस वजह से इन दोनों को एक ही connection पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है और दोनों के लिए अलग-अलग supply की भी जरूरत पड़ेगी। लेकिन आप इसे रिले के माध्यम से इस तरह से switching करना चाहते हैं कि एक ही बार में दोनों बल्ब on हो और एक ही बार में दोनों off भी हो।

तो इसके लिए आपको Two Poles One Way Relay की जरूरत होगी। ये रिले एक बार में अकेले ही 2 switch का काम इस तरह से कर सकता है कि दोनों switch के pin आपस में touch भी नहीं हो सकते। इस रिले में 6 pin होते हैं जिसमें 2 pin power के लिए होता है और बाकी बचे 4 पिन में से 2-2 पिन दोनों pole में switching के लिए होता है।
Second Example, माना कि आपके पास एक ac bulb है और आप इसे एक ही रिले से इस तरह से switching करना चाहते हैं कि एक ही बार में इस बल्ब के दोनों connection (गर्मी और ठंडी) को काटा जा सके, तो इस काम के लिए भी इसी रिले की जरूरत पड़ेगी।

(5) Two Pole Two Way Relay
यदि आप एक ही relay से एक ही बार में Two-Way Relay और Two Poles One Way Relay दोनों तरह के काम लेना चाहते हैं तो इसके लिए आपको Two Poles Two Way Relay की जरूरत पड़ेगी। इस relay में 8 pin होते हैं जिनमें से 2 पिन power के लिए होते हैं और बाकी बचे 6 pin में से 3-3 पिन अलग-अलग pole के होते हैं। और दोनों pole में ये 3-3 पिन 2 way switching के लिए होते हैं।

Relay का use

रिले एक electrical switch है जो पहले से निर्धारित Power Supply मिलने पर खुद ही on हो जाता है और supply कटने पर खुद ही off भी हो जाता है। रिले में एक विद्युत चुंबक होता है जो power source से जुड़ा होता है तथा विद्युत चुंबक की सहायता से किसी अन्य एक या एक से अधिक सर्किट को ऑन या ऑफ कर सकता है। के इस्तेमाल automatic type के उपकरणों में किये जाते हैं। इन उपकरणों के अच्छे उदाहरण Stabilizer, UPS, Inverter इत्यादि हैं बिना रिले के इन उपकरणों का कोई महत्व ही नहीं रह जाता है। Because ये सभी ऑटोमेटिक device होते हैं और इनके किट समय-समय पर खुद ही उचित काम करने के लिए अपने connection परिपथ को बदलते रहते हैं जो कि रिले की सहायता से ही संभव हो पाता है।

एक ही नियंत्रण Circuit द्वारा एक या एक से अधिक Circuits को ON Or OFF करना।
किसी Circuit से विद्युतीय रूप से बिना जुड़े हुए भी उसे Control करने में सक्षम होती है।
कम पावर खर्च करके बहुत अधिक विद्युत शक्ति को Control कर सकते है
सभी automatic उपकरणों में रिले का उपयोग किया जाता है लेकिन कुछ उपकरणों में रिले का उपयोग नहीं किया जाता है इसका सबसे अच्छा उदाहरण electric iron है ।

Note:- यहाँ रिले के बारे में बताया गया है वो basic है। आपको अन्य तरह के रिले भी देखने को मिल सकते हैं। लेकिन उन सभी का एक यही basic रहेगा और आप उस रिले को देखकर ही उसके बारे में अच्छे से समझ जायेंगे।

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