Lubricant | 1 important substance used for lubrication

Lubricant

Lubrication के लिए प्रयोग किया जाना वाला पदार्थ है जो दो गतिशील सतहों के बीच घर्षण कम करके कार्यकुशलता बढ़ाए , इसमें घोलने या बाह्य कणों के परिवहन और गर्मी के वितरण का कार्य हो सकता है।

Lubrication system के उद्देश्य

Moving parts के बीच घर्षण कम करना जिससे Moving parts के बीच घिसावट कम हो।

इंजन पार्ट्स को ठंडा करने के लिए कूलिंग मीडिया के रूप में कार्य करना ।

इंजन पार्ट्स पर जमे कार्बन एवं गंदगी को साफ करना और इंजन बेयरिंग एवं इंजन पार्ट्स के बीच shock absorb करना ।

इंजन पार्ट्स को corrosion से बचाना ।

Parts of Lubrication system

Oil sump

Stainer

Oil pump

Oil filter

Oil pressure relief valve

Oil dipstick

Oil gauge/pressure indicator

Oil gallery

Breathing system

Oil cooler

आदि ।

Properties of Lubricant

Liquid lubricant
यहाँ 10, 0॰ F/-17.2॰C पर ऑइल की Viscosity.
और 30, 212 ॰ F/100॰C पर ऑइल की Viscosity.

Oiliness – Lubricant में चिकनाहट को दर्शाता है ।

Viscosity – लूब्रिकेंट के इस गुण में उसके बहाव संबंधी अवरोध का पता लगता है कि विभिन्न तापमानों पर लूब्रिकेंट का बहाव कितना है । इसको विस्कोमीटर के द्वारा मापा जाता है और नंबरों में प्रकट किया जाता है जैसे- S.A.E. – 10 , S.A.E. – 20 आदि ।

Specific Gravity – ये लूब्रिकेंट का भारीपन दर्शाती है, भार की तुलना पानी के भार से की जाती है ।

Flash Point – लूब्रिकेंट के इस गुण में लूब्रिकेंट जिस तापमान पर भाप के रूप में परिवर्तित हो जाता है वह फ्लैश प्वाइंट कहलाता है ।

Fire Point – लूब्रिकेंट के इस गुण में लूब्रिकेंट जिस तापमान पर गर्म होकर जलने लगता है वह फायर प्वाइंट कहलाता है । यह तापमान फ्लैश प्वाइंट से लगभग 20°F अधिक होता है ।

Pour Point – लूब्रिकेंट के इस गुण में लूब्रिकेंट जिस तापमान पर बहना रुक जाता है वह pour प्वाइंट कहलाता है ।

Adhesiveness – इंजन ऑइल (लूब्रिकेंट) के कणों का आपस में चिपकने एवं सतह से चिपकने का गुण ।

Neutrilization Number – इंजन ऑइल (लूब्रिकेंट) की अम्लीयता एवं क्षारीतया को दर्शाता है ।

Anti Corrossion – इंजन ऑइल (लूब्रिकेंट) जंग रोधी होना चाहिए ।

आदि ।

Types of Lubricant

लीक्विड लूब्रिकेंट्स

ये लूब्रिकेंट्‌स तरल पदार्थ के रूप में पाए जाते हैं । इनकी उत्पत्ति की प्रकृति के अनुसार इनका वर्गीकरण एनिमल ऑयल, मिनरल ऑयल, सिंथेटिक ऑयल आदि की तरह किया जाता है । इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन द्वारा उत्पादन के अनुसार इनका वर्गीकरण ऑटोमोटिव लूब्रिकेटिंग ऑयल, रेल रोड ऑयल, इंडस्ट्रियल लूब्रिकेटिंग ऑयल इत्यादि की तरह किया जाता है ।

औद्योगिक उद्देश्यों के लिए मशीन टूल्स में प्रायः निम्नलिखित लुब्रिकेंट्‌स प्रयोग में लाए जाते हैं- टर्बाइन ऑयल, सर्क्यूलेटिंग ऑर हाईड्रोलिक ऑयल, सर्क्यूलेटिंग ऑयल (एंटीवियर टाइप) स्पिंडल ऑयल, गियर ऑयल इत्यादि ।

स्पिंडल ऑयल्स को उनकी विस्कॉसिटी और फ्लैश प्वाइंट के अनुसार ग्रेडों में बांटा जाता है जैसे सवोपिन-2 सवोपिन-22 आदि । गियर ऑयल्स को भी उनकी विस्कॉसिटी और फ्लैश प्वाइंट के अनुसार ग्रेडों में बांटा जाता है जैसे- सर्वोमैश-68,सर्वोमैश-680 इत्यादि ।

सेमी लिक्विड लूब्रिकेंट

इस वर्ग के लूब्रिकेंट में प्रायः ग्रीस आती है । इसकी विस्कॉसिटी तेल की अपेक्षा अधिक होती है ।

ग्रीस के निम्नलिखित प्रकार

Sodium Base Grease – इस प्रकार की ग्रीस प्रायः वहां पर प्रयोग में लाई जाती है जहां पर मशीन को अधिक स्पीड पर चलाना होता है ।

Calcium Base Grease – इस प्रकार की ग्रीस प्रायः वहां पर प्रयोग में लाई जाती है जहां पर मशीन को कम स्पीड पर चलाना होता है ।

Aluminum Base Grease – इस प्रकार की ग्रीस प्रायः स्लाइड करने वाली फ्लैट सरफेसों पर प्रयोग में लाई जाती है ।

सॉलिड लूब्रिकेंट

इस प्रकार के Lubricant ठोस होते हैं । इनको प्रायः वहां पर प्रयोग में लाया जाता है जहां पर पार्ट्स के बीच में अधिक प्रेशर या तापमान के कारण दूसरे प्रकार के लूब्रिकेंट की परत न बनाई जा सके । प्रायः ग्रेफाइट सॉलिड लूब्रिकेंट के रूप में प्रयोग में लाया जाता है जिसको अकेले या तेल और ग्रीस में मिलाकर प्रयोग करते हैं । इसके अतिरिक्त दूसरे भी सॉलिड लूब्रिकेंट पाये जाते हैं जैसे माइका, टेल्क, वैक्स और सोप स्टोन आदि ।

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