Fly Wheel | फ़्लाईव्हील power स्ट्रोक में प्राप्त power को अन्य 3 स्ट्रोक में डिलीवर करता है

Fly Wheel

इंजन में crank shaft के पिछले छोर पर एक पहिया नुमा भाग लगा रहता है, यह भाग Fly Wheel कहलाता है । स्टेशनरी इंजनों एवं आटोमोबाइल इंजनों में इसकी आकृति अलग होती है । इंजन में सिलिंडरों की संख्या बढ़ने के साथ Fly Wheel का साइज़ छोटा होता जाता है अर्थात सिंगल सिलिंडर इंजन का Fly Wheel बड़ा एवं मल्टी सिलिंडर इंजन का Fly Wheel छोटा होता है । इंजन में जीतने ज्यादा सिलिंडर होंगे उसका फ़्लाईव्हील उतना ही छोटा होता है ।

Fly Wheel

Fly Wheel सामान्यतः कास्ट आइरन का बनाया जाता है ।

Fly Wheel के प्रमुख कार्य

Fly Wheel

फ़्लाईव्हील का सबसे प्रमुख कार्य power स्ट्रोक के समय power को स्टोर करना एवं अन्य 3 स्ट्रोक के समय crank shaft को यह power उपलब्ध कराना । 4 सिलिंडर इंजन में crank shaft के प्रत्येक 180॰ घूमने पर एक power स्ट्रोक होता है । 6 सिलिंडर इंजन में crank shaft के प्रत्येक 120॰ घूमने पर एक power स्ट्रोक होता है । 8 सिलिंडर इंजन में crank shaft के प्रत्येक 90॰ घूमने पर एक power स्ट्रोक होता है ।


फ़्लाईव्हील power स्ट्रोक में प्राप्त power को अन्य 3 स्ट्रोक में डिलीवर करता है जिससे इंजन की गति सामान्य बनी रहती है।
फ़्लाईव्हील अपने वजन के कारण इंजन को भी बैलेन्स करता है एवं इंजन की वाइब्रेशन को अब्सॉर्ब करता है ।
फ़्लाईव्हील के द्वारा ही इंजन स्टार्ट किया जाता है । इसके लिए फ़्लाईव्हील के ऊपर एक रिंग gear लगा रहता है, जिसका सम्बन्ध सेल्फ स्टार्टर से रहता है, जिसके द्वारा इंजन स्टार्ट किया जाता है ।
फ़्लाईव्हील पर ही क्लच जुड़ा रहता है जिसके माध्यम से फ़्लाईव्हील के द्वारा ट्रांसमिशन सिस्टम को power भेजी जाती है ।

Fly Wheel की संरचना

Fly Wheel

फ़्लाईव्हील को बोल्ट की सहायता से crank shaft के पिछले सिरे पर फिट किया जाता है ।
स्टेशनरी इंजनों में फ़्लाईव्हील को सामान्यतः key की सहायता से crank shaft के पिछले भाग पर फिट किया जाता है ।
फ़्लाईव्हील पर रिंग gear चढ़ा रहता है । इस gear का सम्बन्ध स्टार्टर मोटर से होता है । इंजन को स्टार्ट करते समय स्टार्टर मोटर रिंग gear से जुड़कर फ़्लाईव्हील को घुमाती है, जिससे इंजन स्टार्ट होता है।
फ़्लाईव्हील एवं रिंग gear के बीच में श्रिंकेज फिट होती है ।
फ़्लाईव्हील पर टाइमिंग मार्क बना होता है ।
फ़्लाईव्हील पर क्लच प्लेट के लिए होल बने होते हैं ।

Fly Wheel का रख-रखाव

फ़्लाईव्हील पर जहां क्लच प्लेट लगी रहती है वहाँ क्लच प्लेट के घर्षण के कारण लाइने पड़ जाती हैं। ऐसी स्थिति में फ़्लाईव्हील को लेथ मशीन पर टर्न करवा लेना चाहिए ।
फ़्लाईव्हील का रिंग gear भी कभी-कभी खराब हो जाता है, इसलिए इसके स्थान पर दूसरा gear लगाना चाहिए ।
फ़्लाईव्हील का रन आउट, डायल गेज से चेक कर लेना चाहिए ।

Fly Wheel के सहायक भाग

इंजन में फ़्लाईव्हील के निम्न सहायक भाग होते हैं :
वाइब्रेशन डेंपर
crank केस
ऑइल sump
ऑइल पम्प
टाइमिंग gear
चैन टेंशनर
चैन स्प्रोकेट
क्लच
फ़्लाईव्हील कपलिंग
आदि ।

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