Dynamo (एन्योस जेडिक ने 1827 में विद्युत चुम्बकीय घूर्णक उपकरणों के साथ प्रयोग) | Improved

Dynamo

Dynamo
“डायनेमो इलेक्ट्रिक मशीन”

Dynamo ग्रीक शब्द डायनामिस से बना हुआ है, जिसका तात्पर्य पावर या शक्ति से है। Dynamo मुख्य रूप से विद्युत जनरेटर का दूसरा नाम है। इसका तात्पर्य एक जनरेटर या जनित्र से होता है, जो कम्यूटेटर के उपयोग से direct current उत्पन्न करता है। Dynamo पहले विद्युत जनरेटर थे, जो उद्योगों में विद्युत शक्ति के जनन के लिए कुशल या सक्षम थे। Dynamo के सिद्धांत के आधार पर ही कई अन्य विद्युत उत्पादन करने वाले रूपांतरक उपकरणों का विकास हुआ, जिसमें विद्युत मोटर, प्रत्यावर्ती धारा जनित्र और रोटरी कन्वर्टर आदि शामिल हैं।

आधुनिक समय में विद्युत उत्पादन के लिए Dynamo का उपयोग बहुत सीमित है। कम्यूटेटर उतना लाभकारी नहीं रहा,क्योंकि आज alternating current का महत्व बढ़ गया है, और ठोस अवस्था विधियों का उपयोग करके alternating current को आसानी से direct current में परिवर्तित किया जा सकता है।
एक छोटा विद्युत जनरेटर, जिसे रोशनी पैदा करने के लिए साइकल के पहिये के हब में बनाया जाता है, ‘हब डायनेमो’ कहलाता है, हालांकि ये प्रत्यावर्ती धारा उपकरण होते हैं।

Dynamo का परिचय

Dynamo में घूर्णन करती हुई तारों की कुंडली और चुम्बकीय क्षेत्र का उपयोग करके यांत्रिक घूर्णन की ऊर्जा को फैराडे के नियमानुसार direct electric current में परिवर्तित किया जाता है।

Dynamo में एक स्थिर सरंचना ‘स्टेटर’ होती है, जो एक स्थिर चुम्बकीय क्षेत्र उपलब्ध कराती है तथा घूर्णन करती हुई वाइनडिंग्स का एक सेट होता है, जो आर्मेचर कहलाता है, यह चुम्बकीय क्षेत्र में तीव्रता से घूमता है। चुंबकीय क्षेत्र में तार की गति के कारण धातु में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों पर बल जनित होता है, जिससे तार में विद्युत धारा उत्पन्न होती है।

छोटी मशीनों में स्थिर चुम्बकीय क्षेत्र को एक या अधिक स्थायी चुम्बकों के द्वारा उपलब्ध कराया जा सकता है, बड़ी मशीनों में स्थिर चुम्बकीय क्षेत्र एक या अधिक विद्युत चुम्बकों के द्वारा उपलब्ध कराया जाता है, जिसे आमतौर पर field coils कहते है।

कम्यूटेटर की आवश्यकता Direct Current के उत्पादन के लिए हुई। जब तार का एक लूप एक चुम्बकीय क्षेत्र में घूर्णन करता है, इसमें उत्पन्न प्रेरित विभव प्रत्येक आधे घूर्णन के बाद उलट जाता है, जिसके परिणामस्वरूप प्रत्यावर्ती धारा जनित होती है। विद्युतीय प्रयोगों के प्रारम्भिक दिनों में प्रत्यावर्ती धारा का कोई ज्ञात उपयोग नहीं था। विद्युत के कुछ उपयोग जैसे विद्युत लेपन में तरल बैटरियों की सहायता से दिष्ट धारा का उपयोग किया जाता था।

Dynamo का आविष्कार बैटरी के प्रतिस्थापन के रूप में किया गया। कम्यूटेटर मोटे तौर पर एक रोटरी स्विच होता है। इसमें मशीन के शाफ्ट पर चढ़ाये गए सम्पर्कों का एक सेट होता है, जिन्हें ग्रेफाइट-ब्लॉक के स्टेशनरी (स्थिर) सम्पर्कों के साथ संयोजित किया जाता है जो “ब्रश” कहलाते हैं। क्योंकि सबसे पहले लगाये गए इस प्रकार के सम्पर्क धातु के ब्रश थे। जब विभव उलटता है कम्यूटेटर बाह्य परिपथ के लिए वाइनडिंग्स कनेक्शन को उलट देता है इसलिए प्रत्यावर्ती धारा के बजाय निरंतर एक दिष्ट धारा का उत्पादन होता है।

Dynamo के विकास में ऐतिहासिक मील के पत्थर

पहले इलेक्ट्रिक जनरेटर का आविष्कार 1831 में माइकल फैराडे के द्वारा किया गया, इसमें ताम्बे की एक डिस्क को चुम्बक के ध्रुवों के बीच घुमाया गया था।

Dynamo
फैराडे की डिस्क

यह Dynamo नहीं था क्योंकि इसमें कम्यूटेटर का उपयोग नहीं किया गया था। फैराडे की डिस्क बहुत कम वोल्टेज उत्पन्न करती थी क्योंकि चुम्बकीय क्षेत्र में विद्युत धारा का केवल एक ही पथ प्रवाहित हो रहा था। फैराडे और अन्य लोगों ने पाया कि अगर तार को कई बार घुमाकर कुंडली बना दी जाये तो यह वाइनडिंग उच्च और अधिक उपयोगी वोल्टेज उत्पन्न कर सकती है। तार की वाइनडिंग्स में घेरों की संख्या को बदल कर कोई भी वांछित वोल्टेज आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। इसलिए इसी विशेषता का उपयोग बाद में जनरेटर के सभी डिजाइनों में किया गया सिर्फ दिष्ट धारा के उत्पादन के लिए कम्यूटेटर के आविष्कार की आवश्यकता थी।

जेडिक का डायनेमो

हंगरी के एन्योस जेडिक ने 1827 में विद्युत चुम्बकीय घूर्णक उपकरणों के साथ प्रयोग करने शुरू किये, जिन्हें उन्होंने electromagnetic self rotors कहा। एक ध्रुव के विद्युत स्टार्टर के प्रोटोटाइप में स्थिर और घूर्णन करने वाले दोनों भाग विद्युत चुम्बकीय थे। उन्होंने Dynamo की अवधारणा सीमेन्स और व्हीटस्टोन से लगभग छह साल पहले दी थी लेकिन उन्होंने इसे पेटेंट नहीं कराया क्योंकि उन्होंने सोचा कि वे ऐसा करने वाले पहले व्यक्ति नहीं हैं। उनके डायनेमो में स्थायी चुम्बकों के बजाय एक दुसरे के विपरीत दो विद्युत चुम्बकों का प्रयोग किया गया था जो रोटर के चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र प्रेरित करती थीं।

यह डायनेमो स्व-प्रेरण की सिद्धांत की खोज भी थी।

पिक्सी का डायनेमो

Dynamo
पिक्सी का डायनेमो- कम्यूटेटर घूमती हुई चुम्बक के नीचे शाफ्ट पर स्थित है।

फैराडे के सिद्धांत पर आधारित पहले Dynamo का निर्माण 1832 में एक फ्रांसीसी उपकरण निर्माता हिप्पोलाईट पिक्सी के द्वारा किया गया। इसमें एक स्थायी चुम्बक का उपयोग किया गया था जो एक क्रैंक के द्वारा घूर्णन करती थी।

घूमते हुए चुम्बक को इस प्रकार से रखा गया था कि विद्युतरोधी तार में लपेटे गए लोहे का एक टुकड़ा इसके उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों के बीच में से होकर गुजरता था। पिक्सी ने पाया कि हर बार जब ध्रुव और कुंडली एक दूसरे के पास से होकर गुजरते हैं, तार में विद्युत धारा का आवेग उत्पन्न होता है। हालांकि चुम्बक के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव विपरीत दिशाओं में धारा को प्रेरित करते हैं।

प्रत्यावर्ती धारा को दिष्ट धारा में परिवर्तित करने के लिए, पिक्सी ने कम्यूटेटर की खोज की, यह शाफ्ट पर एक विभाजित धातु का बेलन था जिसमें धातु के दो स्प्रिंग सम्पर्क शाफ्ट के दोनों ओर थे।

पेसिनोटी का डायनेमो

Dynamo
पेसिनोटी का डायनेमो, 1860

प्रारम्भिक डिजाइनों में एक समस्या थी इनके द्वारा उत्पन्न विद्युत धारा में धारा के “आवेगों” की एक श्रृंखला होती थी जो एक दूसरे से बिलकुल अलग नहीं होते थे जिसके फलस्वरूप औसत शक्ति का उत्पादन कम होता था। इसी तरह से उस समय की विद्युत मोटरों में डिजाइनर चुम्बकीय परिपथ में बड़े Air Gap के गंभीर हानिकारक प्रभाव को पूरी तरह से समझ नहीं पाए।

भौतिकी के एक इटालवी प्रोफ्रेसर एंटोनियो पेसिनोटी ने 1860 के दशक में इस समस्या का समाधान किया। इसके लिए उन्होंने घूर्णन करती हुई द्वि-ध्रुवी अक्षीय कुंडली को बहु-ध्रुवी टोरोइड कुंडली से प्रतिस्थापित कर दिया। टोरोइड बनाने के लिए उन्होंने लोहे की एक रिंग पर लगातार वाइनडिंग्स लपेटीं और रिंग के चारों तरफ बराबर दूरी के बिन्दुओं पर इसे कम्यूटेटर से जोड़ दिया । इससे कम्यूटेटर कई खण्डों में विभाजित हो गया। अर्थात कुंडली का कुछ हिस्सा लगातार चुम्बक में से होकर गुजर रहा था जिससे धारा निरंतर हो गयी।

सीमेन्स और व्हीटस्टोन के डायनेमो

डायनेमो के पहले व्यावहारिक डिजाइनों की घोषणा अलग – अलग और एक साथ डॉ॰ वार्नर सीमेन्स और चार्ल्स व्हीटस्टोन के द्वारा की गयी। सीमेन्स ने 17 जनवरी 1867 को बर्लिन अकादमी में “डायनेमो-इलेक्ट्रिक मशीन” की घोषणा की, जिसमें स्टेटर क्षेत्र उत्पन्न करने के लिए स्थायी चुम्बकों के बजाय स्वयं पावर उत्पन्न करने वाले विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र कुंडलियों का उपयोग किया गया। उसी दिन चार्ल्स व्हीटस्टोन ने रॉयल सोसाइटी में एक पेपर पढ़ते हुए इसी तरह के एक डिजाइन की घोषणा की इनमें अंतर यह था की सीमेन्स के डिजाइन में स्टेटर विद्युत चुम्बक रोटर के साथ श्रृंखला में थे जबकि व्हीटस्टोन के डिजाइन में ये सामानांतर थे।

स्थायी चुंबक के बजाय विद्युत चुम्बक का उपयोग एक Dynamo की शक्ति उत्पदान की दर को अत्यधिक बढ़ा देता है और इस तरह से पहली बार उच्च उर्जा का उत्पादन किया गया। इस आविष्कार का उपयोग सीधे बड़े स्तर पर विद्युत के बड़े औद्योगिक उत्पादन के लिए किया गया।

1870 के दशक में सीमेन्स ने धातु और अन्य सामग्री के उत्पादन के लिए विद्युत आर्क फर्नेन्स (भट्टी) को उर्जा देने के लिए विद्युत चुम्बकीय डायनेमो का उपयोग किया गया।

ग्राम रिंग डायनेमो

Dynamo
ग्राम का छोटा डायनेमो

जेनोबे ग्राम ने 1871 में पहले व्यवसायिक पावर प्लांट का डिजाइन बनाते समय पेसिनोटी के डिजाइन को फिर से खोजा जिसे 1870 के दशक में पेरिस में संचालित किया गया। ग्राम के डिजाइन का एक और फायदा यह था कि इसमें चुम्बकीय फ्लक्स के लिए एक बेहतर फ्लक्स का उपयोग किया गया, इसके लिए चुम्बकीय क्षेत्र वाले स्थान को भारी लौह कोर से भर दिया गया और स्टेशनरी एवं घूर्णन करने वाले भागों के बीच वायु अंतराल को न्यूनतम कर दिया गया।


ग्राम का Dynamo पहली मशीन थी जो उद्योग के लिए व्यावसायिक मात्रा में विद्युत शक्ति का उत्पादन कर सकती थी। बाद में ग्राम रिंग पर सुधार किये गए लेकिन तार के घूमते हुए अंतहीन लूप की मूल अवधारणा को सभी आधुनिक डायनेमो में बनाये रखा गया।

Dynamo
एक निरंतर आउट पुट तरंगरूप के उत्पादन के लिए ग्राम का डायनेमो कैसे कार्य करता है।

ब्रश डायनेमो

1876 में चार्ल्स एफ ब्रश ने अपना पहला Dynamo संकलित किया जिसमें घोड़े के द्वारा खींची जाने वाली ट्रेडमिल का प्रयोग शक्ति उत्पादन के लिए किया जाता था। अमेरिकी पेटेंट#189997 “इम्प्रूवमेंट इन मेग्नेटिक इलेक्ट्रो मशीन्स” को 24 अप्रैल 1877 में प्रस्तुत किया गया।

ब्रश ने ग्राम के मूल डिजाइन से शुरुआत की जिसमें तारें साइड में थीं और रिंग का आंतरिक भाग क्षेत्र के प्रभावी जोन से बाहर था और अत्यधिक उष्मा को बरकरार रखा गया। इस डिजाइन में सुधार करने के लिए उसकी रिंग आर्मेचर की आकृति को एक डिस्क के रूप में बनाया गया जबकि ग्राम का आर्मेचर बेलनाकार था। क्षेत्र विद्युत चुम्बकों को परिधि के चारों ओर रखने के बजाय आर्मेचर डिस्क के पार्श्व में रखा गया।

इसमें चार विद्युत चुम्बकों का उपयोग किया गया, दो उत्तरी ध्रुव वाले और दो दक्षिणी ध्रुव वाले।

सामान ध्रुव एक दुसरे के विपरीत रखे गए इन्हें डिस्क आर्मेचर के प्रत्येक साइड पर रखा गया। 1881 में ब्रश इलेक्ट्रिक कम्पनी के एक डायनेमो को 89 इंच लंबा, 28 इंच चौड़ा और 36 इंच उंचा दर्ज किया गया, इसका वजन 4800 पौंड था और यह लगभग 700 घूर्णन प्रति मिनट की गति से चलता था। यह उस समय दुनिया का सबसे बड़ा डायनेमो माना गया।

इसमें 40 आर्क लाइटों का उपयोग होता था और इसके लिए 36 होर्स पावर की आवश्यकता होती थी।

विद्युत मोटर के सिद्धांत की खोज

मूल रूप से इसे उद्देश्य के लिए डिजाइन नहीं किया गया था, यह पाया गया कि एक डायनेमो विद्युत मोटर का काम कर सकता है जब इसे बैटरी या किसी दूसरे डायनेमो से दिष्ट धरा की आपूर्ति की जाए। 1873 में वियना में एक औद्योगिक प्रदर्शनी में ग्राम ने पाया कि उसके डायनेमो का शाफ्ट घूमने लगा जब इसके टर्मिनल को गलती से विद्युत उत्पादन करने वाले एक दूसरे डायनेमो से जोड़ दिया गया।

हालांकि यह एक विद्युत मोटर का पहला प्रदर्शन नहीं था लेकिन यह पहला व्यावहारिक प्रदर्शन था। यह पाया गया कि डिजाइन में एक ही तरह की विशेषताएं जो डायनेमो को प्रभावी बनाती हैं वे मोटर को भी प्रभावी बनाती हैं, ग्राम का प्रभावी डिजाइन जिसमें छोटे चुम्बकीय वायु अंतराल थे और तार की कई कुंडलियों को कई-विभाजित कम्यूटेटर से जोड़ा गया था, वह सभी व्यवहारिक दिष्ट धारा मोटरों के डिजाइन का आधार बन गया।

दिष्ट धारा उत्पन्न करने वाले बड़े डायनेमो उन स्थितियों में समस्याजनक होते थे जहां दो या अधिक डायनेमो एक साथ काम कर रहे होते हैं और एक का इंजन दूसरे की तुलना में कम पावर पर चल रहा होता है। कम क्षमता के इंजन के घूर्णन के बजाय, अधिक क्षमता के इंजन वाला डायनेमो कम क्षमता के इंजन वाले डायनेमो को चलाने लगता है जैसे यह मोटर हो। ऐसी रिवर्स ड्राइविंग से डायनेमो का इंजन चलने लगता है और कम क्षमता वाले डायनेमो में खतरनाक रिवर्स स्पिनिंग की स्थिति उत्पन्न हो सकती है जो नियंत्रण से बाहर हो जाती है।

अंत में यह पाया गया कि जब कई डायनेमो को एक साथ इसी तरह की पावर के स्रोत से जोड़ा जाता है तो वे सभी इंजनों को जोड़ने वाले जैकशाफ्ट का उपयोग करते हुए एक साथ चलने लगते हैं और रोटर में ये असंतुलन उत्पन्न हो जाते हैं।

कम्युटेटर युक्त दिष्ट धारा जनरेटर के स्वरूप में डायनेमो

प्रत्यावर्ती धारा जनरेटर की खोज के बाद जब वास्तव में प्रत्यावर्ती धारा का उपयोग किसी भी स्थान पर किया जा सकता था तब Dynamo का उपयोग विशेष रूप से कम्युटेटर से युक्त दिष्ट धारा विद्युत जनरेटर से सम्बन्धित हो गया जबकि प्रत्यावर्ती धारा जनरेटर में स्लिप रिंग या रोटर चुम्बक का इस्तेमाल किया जाने लगा जिसे अल्टरनेटर कहा गया।

ए सी विद्युत मोटर जिसमें स्लिप रिंग या रोटर चुम्बक का उपयोग किया जाता था उसे synchronous motor कहा जाने लगा और कम्युटेटर से युक्त दिष्ट धारा मोटर को विद्युत मोटर भी कहा जाने लगा हालांकि यह बात समझी जा चुकी थी कि यह जनरेटर की तरह के सिद्धांत पर ही काम करती है।

रोटरी कनवर्टर का विकास

जब Dynamo और Motor आसानी से यांत्रिक और विद्युत उर्जा को एक दूसरे में परिवर्तित करने लगे इन्हें रोटरी कन्वर्टर नामक उपकरण में संयुक्त रूप से काम में लिया गया, यह एक घूर्णन करने वाली मशीन होती है, जिसका उद्देश्य विद्युत शक्ति का जनन करना नहीं होता बल्कि यह एक प्रकार की विद्युत धारा को दूसरे प्रकार में परिवर्तित करती है, उदाहरण के लिए प्रत्यावर्ती धारा को दिष्ट धारा में।

ये बहु क्षेत्रीय एक रोटर वाले उपकरण थे जिनमें घूमने वाले सम्पर्कों के दो या अधिक सेट होते थे (आवश्यकता के अनुसार कम्युटेटर या स्लिप रिंग) इनमें से एक उपकरण को घुमाने के लिए आर्मेचर वाइन्डिंग के एक सेट को शक्ति प्रदान करता था और एक या अधिक को आउटपुट धारा के उत्पादन के लिए अन्य वाइन्डिंग्स से जोड़ा जाता था।

रोटरी कनवर्टर सीधे आंतरिक रूप से किसी भी प्रकार के शक्ति को दूसरे प्रकार में परिवर्तित कर सकता है। इसमें प्रत्यावर्ती धारा और दिष्ट धारा के बीच रूपांतरण तीन फेस और एक फेस की शक्ति के बीच रूपांतरण 25 Hz AC और 60 Hz AC या एक ही समय पर कई अन्य भिन्न आउटपुट वोल्टेज के बीच रूपांतरण शामिल है। रोटर का आकार और भार बड़ा था ताकि रोटर एक फ्लाईव्हील का काम कर सके और आपूर्ति की जा रही शक्ति में अचानक परिवर्तन आने पर भी निरंतर शक्ति प्रदान कर सके।

प्रारूपिक रोटरी कन्वर्टर्स का उपयोग आज भी मैनहट्टन में वेस्ट इड आईआरटी सबवे में किया जाता है। लगभग 1960 के दशक के अंत में इन्हें 25 हर्ट्ज ए सी के द्वारा संचालित किया जाता था और ये ट्रेनों के लिए 600 वोल्ट की दिष्ट धारा उपलब्ध कराते थे।

रोटरी कन्वर्टर्स की प्रौद्योगिकी को 20 वीं सदी के प्रारम्भ में मरकरी-वेपर रेक्टिफायर के द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया गया जो छोटे थे कम्पन और शोर उत्पन्न नहीं करते थे और इन्हें कम रखरखाव की आवश्यकता होती थी। इसी प्रकार का रूपांतरण कार्य वर्तमान में ठोस अवस्था पावर अर्धचालक उपकरणों के द्वारा किया जाता है।

Dynamo का उपयोग

डायनेमो का उपयोग आज भी कम क्षमता के उत्पादन में किया जाता है विशेष रूप से जहां कम वोल्टेज की दिष्ट धारा की आवश्यकता होती है। इन अनुप्रयोगों में एक अर्धचालक रेक्टिफायर से युक्त अल्टरनेटर अप्रभावी होता है। हाथ के क्रैंक वाले डायनेमो का उपयोग क्लोकवर्क रेडियो, हाथ से चलने वाली फ्लैश लाईट, मोबाइल फोन रीचार्जर और बैटरियों को रिचार्ज करने के लिए अन्य मानव संचालित उपकरणों में किया जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *