Diode | brilliant electronic component

Diode

Diode का पूरा नाम सेमी कन्डक्टर डायोड वाल्व है। डायोड एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक कम्पोनेंट है जो AC को DC में बदलकर करंट को केवल एक ही दिशा में बहने की अनुमति देता है दूसरी दिशा में नही, क्योंकि DC करंट एक ही दिशा में प्रवाहित होते है। इसके एक छोर में हाई रजिस्टेंस होता है तो दूसरे छोर में लो रजिस्टेंस होता है। सिलिकॉन और जर्मेनियम जैसे सेमीकंडक्टरो का इस्तेमाल डायोड बनाने में किया जाता है। डायोड के दो सिरे होते है इनमें से एक सिरे को एनोड तथा दूसरे सिरे को कैथोड कहते है।

Diode
Diode symbol

डायोड का इतिहास

वाल्व का आविष्कार अमेरिका के थॉमस अल्वा एडिसन नामक वैज्ञानिक ने उन्नीसवीं शताब्दी के अंत (1883 ई.) में किया था । एडिसन ने देखा की यदि साधारण बिजली के बल्व में एक धात्विक प्लेट और लगा दी जाये तथा बल्व को पूर्णतः निर्वात कर दिया जाए तो निर्वात में से होकर फिलामेन्ट और प्लेट (धनावेशित) के बीच करंट प्रवाहित की जा सकती है। एडिसन का आविष्कार Edison effect के नाम से विख्यात हुआ ।

सन 1904 में वैज्ञानिक जॉन एन्ब्रोस फ्लैमिंग ने पहला तापायानी डायोड पेटेन्ट कराया | इलैक्ट्रॉन एमिशन सिद्धान्त के आधार पर एडिसन प्रभाव की व्याख्या की और इस एक दिशा में कार्य करने वाली युक्ति का नाम वाल्ब रखा । वाल्व क्योंकि पूर्णतः निर्वात होता है अतः इसे वैक्यूम ट्यूब भी कहा जाता है । फ्लैमिंग ने ही वाल्व का उपयोग AC को DC में परिवर्तित करने वाले परिवर्तक के रूप में किया ।

जब वायरलेस तकनीक अपने शुरुआती दौर में थी, Cat’s Whisker Diode इस्तेमाल किया जाने वाला सबसे पहले डायोड में से एक था। इसमें तार के एक बहुत पतले टुकड़े का इस्तेमाल होता था जिसे सेमीकंडक्टर जैसे मटेरियल में रखकर एक Point Contact Diode के रूप में इस्तेमाल में लिया जाता था। इसको 1920 के दशक तक काफी इस्तेमाल में लिया गया ।
द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान रडार सेट में लगाने के लिए नए डायोड्स की आवश्यकता थी। सेमीकंडक्टर डायोड का आकार में छोटा होने की वजह से इसे एक बेहतरीन विकल्प के रूप में देखा गया। इसके अलावा रडार में इस्तेमाल होने वाली फ्रीक्वेंसी को भी ये काफी बढ़िया तरीके से चलाने में सक्षम था।

कोई भी डायोड जर्मेनियम या सिलिकॉन सेमी कंडक्टर का बना होता है। किसी भी डायोड में एक जंक्शन और लैपर होती है। डायोड फॉरवर्ड बायस करंट रेटिंग और रिवर्स बायस वोल्टेज रेटिंग के हिसाब से मिलते है।
जैसे– IN 4001 1 Ampier 100 volt IN 4003 1 Ampier 300 volt यह वोल्ट रिवर्स बायस में होती है तथा डायोड की वोल्ट बाद की सख्या पर निर्भर करती है। किसी भी डायोड का साइज उसकी करंट रेटिंग के ऊपर निर्भर करता है।

डायोड साइज में जितना ज्यादा होगा उसकी करंट रेटिंग उतनी ही अधिक होगी 6 एम्पीयर से अधिक के डायोड को मैटल कवर के अंदर बनाये जाते है। इसीलिए अधिक एम्पीयर के डायोड को मैटल डायोड या पावर डायोड के नाम से भी जानते है। मैटल डायोड 5-6 एम्पीयर से लेकर हजारो एम्पीयर तक हो सकते है।

डायोड की संरचना

डायोड Semiconductor से बने होते है अर्थात वर्तमान में use होने वाले डायोड Semiconductor डायोड है। Semiconductor डायोड P Types Semiconductor और N Types Semiconductor से बने होते है इन्हें P-N Junction डायोड कहते है। P Types Semiconductor और N Types Semiconductor को डोपिंग द्वारा जोड़ा जाता है।

Diode

डायोड भले ही दिखने में छोटा होता हो लेकिन यह कई बड़े कार्य करने में सक्षम होता है। डायोड को हम रेक्टिफायर्स, सिग्नल मोडुलेटर, वोल्टेज रेगुलेटर, सिग्नल लिमिटर्स आदि के रूप में प्रयोग करते हैं। जब कभी भी डायोड के कैथोड टर्मिनल को नेगेटिव वोल्टेज से जोड़ा जाता है और एनोड को पॉजिटिव वोल्टेज से जोड़ा हैं तो उस समय करंट प्रवाहित होने लगता है और इस विधि को फॉरवर्ड बायसिंग कहते हैं।

डायोड का कार्य सिद्धांत

Semiconductor डायोड की Working Process दो step में होती है पहली Forward Bias और दूसरी Reverse Bias.

Forward Bias

Forward Bias में Battery के धन सिरे को डायोड के एनोड से जोड़ा जाता है और battery के ऋण सिरे को कैथोड से जोड़ा जाता है तब Current Flow होने लगता है।

Reverse Bias

इसमें Battery के धन सिरे को डायोड के कैथोड से जोड़ा जाता है और ऋण सिरे को डायोड के एनोड से जोड़ा जाता है तब इसे Reverse Bias कहते है इसमें धारा नहीं बहती है।

डायोड के प्रकार

Normal डायोड जो लगभग हर circuit में प्रयोग होता है, और Zener डायोड का use Over voltage Protection के लिए होता है। इलैक्ट्रोनिक्स सर्किट्स में विभिन्न प्रकार के सेमी कन्डक्टर डायोड्स प्रयोग में लाये जाते है। प्रत्येक डायोड का कार्य तथा उनका उपयोग अलग-अलग है। ये निम्नलिखित है-

Normal Diode
Zener diode
P-N junction diode
Light emitting diode
Tunnel diode
Varactor diode
Avalanche diode
Laser diode
Vaccum Diode
Schottky diode
PIN diode
Photo diode etc.

Zener Diode

जेनर डायोड का अविष्कार Clarence Zener ने 1934 में किया था। इसे एवलांची डायोड भी कहते है।इसका कार्य डी. सीं. वोल्टेज रेगुलेट कराना होता है। जीनर डायोड रिवर्स बायस में कार्य करता है । जब रिवर्स वोल्टेज बढ़ायी जाती है तो एक निश्चित वोल्टेज पर डायोड ब्रेक डाउन कर जाता है तथा बहुत अधिक मात्रा में रिवर्स करंट प्रवाहित होती है ।

अर्थात यह डायोड एक सामान्य डायोड की भाँति बिजली को आगे की दिशा में प्रवाहित करने का कार्य करता है, लेकिन जब कभी वोल्टेज, ब्रेकडाउन वोल्टेज से ज्यादा हो जाए तो यह उस समय उसे उल्टी दिशा में बहने का निर्देश देता है। इसके अविष्कार का उद्देश्य केवल एकाएक आ जाने वाली वोल्टेज से बचने के लिए किया गया था। जेनर डायोड वोल्टेज रेगुलेटर के तौर पर भी काम करता है।ये विभिन्न वोल्टेज रेटिंग के बने होते है।

Rectifier Diode

यह एक साधारण P-N जंक्शन डायोड है इसका आधा भाग P टाइप सेमी कन्डक्टर से तथा आधा भाग N टाइप सेमी कन्डक्टर से मिलकर बना होता है।इसका उपयोग ए. सी. वोल्टेज को डी. सी. वोल्टेज में परिवर्तित करने के लिए किया जाता है।इसीलिए इसे रैक्टिफायर डायोड कहते है।इसका प्रयोग बैटरी एलिमिनेटर बनाने तथा विभिन्न प्रकार की पावर सप्लाई सर्किट्स में किया जाता है।

LED (Light Emitting Diode)

यह डायोड इलेक्ट्रिक एनर्जी को लाइट एनर्जी में परिवर्तित करने का कार्य करता है । इसका आविष्कार 1968 में हुआ था । ये एक प्रकार के P-N जंक्सन डायोड होते है। ये Transparent मैटीरियल का बना होता है। यह डायोड electroluminescence विधि के तहत जंक्शन के बीच इलैक्ट्रॉन्स तथा होल्स को ऊर्जा बनाने के लिए फॉरवार्ड बायस में उत्सर्जित प्रकाश के सहारे फिर से जोड़ने का कार्य करता है। यह अधिक मात्रा में बिजली की बचत करता है जिस वजह से यह अधिक लोकप्रिय और उपयोगी हुआ ।
इनका उपयोग विभिन्न प्रकार के इलैक्ट्रोनिक्स खिलौनो, इलैक्ट्रोनिक या डिजिटल घड़ियों, कैल्कुलेटर्स आदि उपकरणों में किया जाता है ।

Shockley Diode

इस डायोड को 1950 में William Shockley ने बनाया था। इस डायोड में 4 लेयर होती है जोकि सेमीकंडक्टर मैटेरियल से बनी होती है। इसको PNPN डायोड भी कहा जाता है। यह डायोड बिना गेट टर्मिनल के किसी थियोरिस्टर के समान होता है। जिसका मतलब है की गेट टर्मिनल को पूरी तरह से काट दिया जाता है। जिस कारण उसके पास कोई ट्रिगर इनपुट्स नहीं होते हैं, और उसके पास वोल्टेज को आगे भेजने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता । इस डायोड में दो ऑपरेटिंग स्टेट्स होती हैं जिसे कंडक्टिंग और नॉनकंडक्टिंग कहा जाता है। non-conducting स्टेट में डायोड को काफी कम वोल्टेज में चलाया जाता है।

इस डायोड का नाम Walter H Schottky के नाम पर रखा गया। Schottky Diode मे सेमीकंडक्टर मैटेरियल और धातु का इस्तेमाल होता है जिस वजह से इसमें वोल्टेज काफी कम ड्रॉप होती है। इस डायोड में धातु के मिले होने की वजह से करंट काफी मात्रा में प्रवाहित होता है।

Tunnel Diode

टनल डायोड को Esaki Diode भी कहा जाता है क्योंकि 1927 में इसका आविष्कार जापानी नोबेल अवार्ड विजेता Leo Esaki ने किया था। टनल डायोड भी एक प्रकार का P-N जंक्शन डायोड ही है। परंतु इसमे Impurities की अधिकता के कारण जंक्शन ब्रेक डाउन आसानी से हो जाता है और Depletion Layer की मोटाई कम हो जाती है। यह डायोड फारवर्ड बायस में कार्य करते है। इसमें ऋणात्मक प्रतिरोध होने के कारण फारवर्ड वोल्टेज बढ़ाने पर धारा का मान एक निश्चित वोल्टेज पर कम हो जाता है, तत्पश्चात बढ़ता है।

इनका उपयोग हाई फ्रीक्वेन्सी सर्किट्स में स्विचिंग के लिए किया जाता है। जब कभी भी किसी कार्य को नैनो सेकंड में करवाना होता है तब टनल डायोड को प्रयोग में लिया जाता है।

Laser Diode

Laser Diode को इंजेक्शन लेजर डायोड के नाम से भी जाना जाता है। यह डायोड Light Emitting Diode की तरह कार्य करता है, लेकिन उसमें इस्तेमाल होने वाली लाइट के बजाय यह एक लेजर बीम बनाता है।लेज़र डायोड का इस्तेमाल इन दिनों बारकोड रीडर, लेजर प्वाइंटर्स और फाइबर ऑप्टिक के अलावा कई अन्य कार्यों में किया जाता है।

Varactor Diode

इस डायोड को Varicap Diode भी कहा जाता है। इस डायोड के अंतर्गत P-N जंक्शन के बीच एक कैपेसिटर बन जाता है जिसकी कैपासिटी रिवर्स बायस के वोल्टेज के साथ बदलती है। इस डायोड का इस्तेमाल वेरिएबल कैपेसिटर की तरह किया जाता है। इस डायोड का इस्तेमाल चार्ज को जमा करने के लिए किया जाता है तथा यह हमेशा ही रिवर्स बॉयस्ड होता है। Varactor Diode हमेशा ही वोल्टेज पर निर्भर रहने वाला सेमीकंडक्टर उपकरण है।

इसका उपयोग विभिन्न उपकरणों जैसे कलर टी.वी. रिसीवर्स के इलैक्ट्रोनिक ट्यूनर सैक्शन में L-C टयून्ड सर्किट्स की वोल्टेज को स्वतः घटाने-बढ़ाने के लिए किया जाता है ।

Constant Current Diode

Constant Current Diode को कई नामों से जाना जाता है जिनमें से Current Regulating Diode,Current Limiting Diode, Diode Connected Transistor प्रमुख है। इस डायोड का काम वोल्टेज को एक निश्चित करंट पर रेगुलेट करने का होता है।

Vaccum Diode

वैक्यूम डायोड दो इलेक्ट्रोड से बना होता है, जो कैथोड और एनोड की तरह कार्य करते हैं। कैथोड टंगस्टन से बना होता है, जो इलेक्ट्रॉन को एनोड की दिशा में भेजने का कार्य करता है। इलेक्ट्रॉन हमेशा ही कैथोड से एनोड की दिशा में जाते हैं, जिससे यह एक स्वीच की तरह कार्य करता है। अगर कैथोड में मेटल ऑक्साइड की परत लग जाए तो इलेक्ट्रॉन को छोड़ने की उसकी क्षमता ज्यादा हो जाती है।

स्टेप रिकवरी डायोड

स्टेप रिकवरी डायोड को स्नेप ऑफ डायोड और चार्ज स्टोरेज डायोड भी कहा जाता है। यह एक विशेष प्रकार का डायोड होता है जो पॉजिटिव पल्स के चार्ज को जमा करने का कार्य करता है, और उसे साइनोसोइडल सिग्नल की नेगेटिव पल्स में उपयोग करता है।

गोल्ड डोप्ड डायोड्स

डायोड में सोने का इस्तेमाल डोपेंट के रूप में किया जाता है। यह डायोड बाकी डायोड्स के मुकाबले ज्यादा तेज होते हैं। डायोड में रिवर्स बॉयस की स्थिति में लीकेज करंट हमेशा ही कम होता है। हाई वोल्टेज होने के बावजूद यह डायोड को सिगनल फ्रिकवेंसी में कार्य करने की अनुमति देता है।

सुपर बैरियर डायोड

सुपर बैरियर डायोड को उचित पुर्जा तेजी से स्विचिंग करने और कम नुकसान होने वाली एप्लीकेशंस के लिए बनाया गया था। सुपर बैरियर डायोड को अगली पीढ़ी के रेक्टिफायर के तौर पर जाना जाता है और यह स्कोटी डायोड से भी कम मात्रा में वोल्टेज को आगे भेजता है।

पेल्टियर डायोड

पेल्टियर डायोड सेमीकंडक्टर के दो मटेरियल जंक्शन में गर्मी उत्पन्न करता है और यह गर्मी एक टर्मिनल से दूसरे टर्मिनल में जाती है। यह Flow केवल एक दिशा में ही होता है।

क्रिस्टल डायोड

क्रिस्टल डायोड को कैट विस्कर भी कहा जाता है जो कि एक प्रकार का Point Contact Diode होता है। इसका संचालन सेमीकंडक्टर क्रिस्टल और पॉइंट के बीच में लगे दबाव पर निर्भर करता है। इसमें एक धातु का तार होता है जो सेमीकंडक्टर क्रिस्टल के खिलाफ लगाया जाता है जिस वजह से सेमीकंडक्टर क्रिस्टल कैथोड की तरह कार्य करने लगता है और धातु की तार एनोड की तरह।

डायोड के उपयोग

॰ डायोड का मुख्य कार्य अल्टरनेटिंग करंट को डायरेक्ट करंट में परिवर्तित करने का होता है और यह कार्य क्षमता उन्हें रेक्टिफायर बना देती है। इनका इस्तेमाल घरों में लगने वाले इलेक्ट्रिकल स्विच के तौर पर किया जाता है क्योंकि यह बढ़ी हुई वोल्टेज को भी आसानी से रोक लेते हैं।

॰ Over Voltage Protection के लिए डायोड का प्रयोग किया जाता है।

॰ Radio demodulation में डायोड का प्रयोग होता है।

॰ तापमान मापने में डायोड का प्रयोग होता है।

॰ Circuit में Current को मोड़ने में Current Steering की तरह डायोड का प्रयोग होता है ।

॰ Signal limiters में,Oscillator में डायोड का प्रयोग होता है।

॰ Voltage Regulator,Signal mixer में डायोड का प्रयोग होता है।

॰ डायोड्स को डिजिटल लॉजिक गेट्स की तरह प्रयोग में लिया जाता है। बहुत से डायोड्स लॉजिक गेट्स की तरह ही कार्य करते हैं और इसका प्रयोग आजकल के आधुनिक प्रोसेसर में किया जाता है।

॰ Light Emitting Diodes को सेंसर के तौर पर प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा इसे अन्य लेजर उपकरणों मे भी प्रयोग होता है।

॰ Zener Diodes को वोल्टेज रेगुलेटर की तरह प्रयोग किया जाता है।

॰ Diode का प्रयोग पावर सप्लाई को बनाने में किया जाता है साथ ही इसे वोल्टेज डेवलर के रूप में भी प्रयोग किया जाता है।

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