DC Motor (3 types) and Fleming’s Left Hand Rule | that successfully converts DC electrical energy into mechanical energy

DC Motor

DC Motor
DC Motor

DC मोटर एक ऐसी मशीन है जो DC Electrical energy को Mechanical energy में convert करती है। Dc motor fleming के Left hand’s rule पर work करती है। DC मोटर को ऐसे स्थानों पर भी प्रयोग किया जा सकता है जहाँ गति नियन्त्रण की आवश्यकता हो।इसलिये प्रायः Train, Tram, Crain, Tools, Toys आदि में DC मोटरों का प्रयोग किया जाता है। यह 1/100 H.P से कई हजार H.P तक के विभिन्न आकारों में बनाई जा सकती है।

DC Motor कार्य सिद्धान्त

किसी धारा प्रवाह करते हुए चालक को चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है तब उस पर एक mechanical force कार्य करता है जिसे Fleming’s left hand rule द्वारा ज्ञात किया जा सकता है । इस बल के कारण चालक बल की दिशा में गतिशील हो जाता है।

यदि चालक की लम्बाई= L मीटर, क्षेत्र तीव्रता = B बेबर प्रति वर्ग मीटर (Bwb/m2 ) तथा चालक में प्रवाहित धारा= i ऐम्पियर हो तो चालक द्वारा अनुभव किया गया बल,

F = iBL न्यूटन होगा।

Fleming’s left hand rule & Dc Motor

DC Motor
Fleming’s left hand rule

यदि हम अपने left hand की first finger और second finger तथा thumb या अंघूठे को इस प्रकार सीधा करें की तीनो एक दुसरे के perpendicular हो


F=force और B=magnetic field यानि की चुम्बकीय फील्ड और I=current या धारा की दिशा बता रही है

जिसमे thumb force की direction या force की दिशा बता रहा और first finger magnetic field की direction बता रहा है और second finger current या धारा की direction बताती है।

Fleming Left Hand Rule से यदि इन तीनों को में से किन्ही भी दो को एक दुसरे के perpendicular रखा जाये तो third अपने आप पैदा हो जायेगा यानि कि Fleming Left Hand Rule से force की direction इन दोनों से perpendicular होगी।

DC Motor
dc Armature

इसी प्रकार Dc motor work करती है इसमें currentऔर magnetic field को एक दुसरे के perpendicullar रखा जाता है तो Force पैदा होता है और force की दिशा flemming के left hand से ही होती है dc motor के armeture में winding इस प्रकार करते है की जब उसमे current flow हो तब वो magnetic field के perpendiculler हो जैसे की नीचे की image में इस armature में जो coper wire है उसका ज्यादा हिस्सा उस तरफ है जो की magnetic field के perpendicular होगा।

magnet N और S का आकार इस तरह है की magnatic field की रेखाएं एक दूसरे के समान्तर होंगी।

DC Motor

Magnetic field

इन magnets के बीच में armature रखा जाये तब coper wire और coper wire में flow होने वाला current ‘I’ magnetic field के perpendicular होगा नीचे image देखें जिसमे current या electric field ,orange color से दिखाया है और magnetic field ,sky blue से जो की एक दुसरे के perpendicular है ऐसी स्थति में force

DC Motor

Magnetic Field + electricfield

dc motor का Armature यदि N और S दो magnet के बीच रखा जाये और current flow किया जाये तब जिनका magnetic effect और Armature में flow current perpendicular होंगे तब force की direction बाहर की तरफ होगी।

Dc motor fleming rule
Dc motor fleming rule

यदि dc motor को घुमाया जाये तो dc current पैदा होगा ऐसा इसलिए होता है की Fleming Left Hand Rule से Force और magnetic field को perpendicular रखा जाए current पैदा होगा जो की generator का काम करेगा
Electric Motor एक ऐसी device है जो की Electrical energy को mechanical energy में Convert करती है चाहे वो ac हो या dc हो

और हम कह सकते है कि Dc motor,Direct current (D.c. current) को mechanical energy में convert करती है।

Types of DC Motor

(1) DC Series Motor

(2) DC Shunt Motor

(3) DC Compound Motor – DC Compound Motor के भी 2 प्रकार होते है।

(i) Commutative Compound Motor

(ii) Differential Compound Motor

(1) DC Series Motor

DC Series Motor की Field Winding, Armature के सीरीज में जोड़ी जाती है, इसीलिए इस मोटर को DC Series Motor कहते है। फील्ड वाइंडिंग मोटी तार की व कम टर्नस की होती है, जिसकी वजह से इसका Resistance कम होता है। इस मोटर को Field Winding और Armature Winding दोनों एक समान Current लेते है। मोटर बिना लोड के कम Current लेती है, और जैसे – जैसे लोड बढ़ता है Current भी बढ़ता जाता है। बिना लोड के इस मोटर को स्पीड बहुत ज्यादा होती है, लेकिन लोड के बढ़ने से कम हो जाती है।

अगर Starting टार्क की बात करें तो स्टार्टिंग टार्क भी बहुत अधिक होता है, इसलिए इन मोटर्स को वहाँ पर इस्तेमाल किया जाता है जहाँ पर high starting torque की जरूरत होती है और जहाँ पर लोड पहले से मोटर पर दिया रहता है। जैसे कि Metro Train यहाँ पर लोड पहले से ही मोटर पर होता है। इन motors का उपयोग Train, Tram, Crain, DC fan और Conveyors में सबसे ज्यादा किया जाता है, क्योकि यहाँ पर High Starting Torque चाहिए होता है और लोड पहले से ही Motor पर होता है।

(2) DC Shunt Motor

इन Motor में Field Winding, Armature के Parallel में लगी होती है, और इन्हें DC Shunt Motor कहते है। इस Motor में field winding पतले तार की व अधिक टर्न की होती है, जिसकी वजह से field winding का Resistance अधिक होता है। इन Motors में Field Winding का Current एक समान ही रहता है लेकिन Armature Current लोड पर आधारित होता है। लोड बढ़ने पर बढ़ जाता है और लोड कम होने पर कम हो जाता है।

इन मोटर की स्पीड पर लोड का कुछ ज्यादा प्रभाव नही पड़ता। बिना लोड के स्पीड ज्यादा होती है और लोड पड़ने पर थोड़ी सी कम हो जाती है। DC Shunt Motor का उपयोग ज्यादातर Tools में किया जाता है और लेथ मशीनों में भी इस मोटर को इस्तेमाल किया जाता है, क्योकि इन मोटरों की स्पीड हमेशा लगभग एक समान ही रहती है।

(3) DC Compound Motor

इन Motors में फील्ड वाइंडिंग सीरीज और पैरेलल दोनों में होती है। सीरीज फील्ड वाइंडिंग मोटी तार और कम टर्न की होती है, इसका Resistance कम होता है। सीरीज फील्ड वाइंडिंग में करंट लोड पर आधारित होता है। कम लोड होगा तो सीरीज वाइंडिंग कम करंट लेगी और अगर ज्यादा लोड होगा तो फील्ड वाइंडिंग ज्यादा करंट लेगी। पैरेलल फील्ड वाइंडिंग पतले तार व अधिक टर्न्स की होती है। इस वाइंडिंग का Resistance भी अधिक होता है। पैरेलल फील्ड वाइंडिंग में करंट लगभग एक समान ही रहता है।Compound Motor भी दो प्रकार के होते है:-

(i) Cumulative Compound Motor

Cumulative Compound Motor के सीरीज और पैरेलल वाइंडिंग में करंट एक ही दिशा में Flow होता है। इन मोटरों में स्पीड लोड पर आधारित होती है, बिना लोड के स्पीड अधिक होगी और लोड के बढ़ने के साथ – साथ कम हो जाएगी। इन मोटरों को वहाँ पर इस्तेमाल किया जाता है जहाँ पर लोड एक दम से मोटर पर आ जाता है और फिर चला जाता है। जैसे हैमर, पंचिंग मशीन, शेयरिंग मशीन, लिफ्ट आदि।

(ii) Differential Compound Motor

इन मोटरों में सीरीज और वाइंडिंग एक दूसरे का विरोध करते है। इन मोटरों में ज्यादा लोड होने पर फ्लक्स कम होगा और कम लोड होने पर फ्लक्स ज्यादा होगा। इन मोटरों की ये खासियत है कि इन मोटरों की बिना लोड के कम स्पीड होती है और जैसे – जैसे लोड बढ़ता है स्पीड भी बढ़ती जाती है। इन मोटरों को ज्यादातर Battery Charging के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

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