Cooling system plays 1 very big role in all Engine & automobiles.

Introduction of Cooling system

Engine में Internal Combustion चैम्बर का तापमान 2200॰C से 2500॰C तक पहुँच जाता है । इससे इंजन और इसके पार्ट्स अत्यधिक गर्म हो जाते हैं । इंजन के तापमान को कम करके इसे operating temperature तक ठंडा करने का कार्य “Cooling system” का होता है । सभी Engine aur Automobiles में कूलिंग सिस्टम बहुत बड़ा Role Play करता है।

इंजन में Cooling system का कार्य : इंजन के तापमान को कम करके इसे operating temperature पर maintain करना । क्योंकि इंजन को कार्य करने के लिए न तो अधिक गर्म होना चाहिए, न तो ठंडा होना चाहिए ।

Need of Cooling system

यदि कूलिंग सिस्टम नहीं होगा तो इंजन over heat हो जाएगा ।

इंजन over heat होने के दुष्परिणाम :
इंजन के पार्ट्स जैसे कि पिस्टन, सिलिंडर , valve आदि गर्म होकर फैलेंगे जिससे इंजन सीज हो जायेंगे । गर्म होकर फैलने के कारण पार्ट्स टेढ़े भी हो सकते हैं । over heating के कारण इंजन valve जल भी जाते हैं । प्री इग्नीशन , नॉकिंग , डेटोनेशन जैसी समस्याएँ होती हैं । लुब्रिकेटिंग ऑइल पतला होकर सही लुब्रिकेशन नहीं कर पाएगा, जिससे पार्ट्स के बीच फ्रिक्शन बढ़ेगा और पार्ट्स जल्दी घिसकर खराब हो जायेंगे । over heat के कारण इंजन की दक्षता और फ्युल इकॉनमी भी प्रभावित होती है ।

Types of Cooling system

Cooling system में इंजन की गर्मी को किसी Cooling मीडिया द्वारा इंजन से निकालकर वातावरण में छोड़ा जाता है । यह Cooling मीडिया मुख्यतः Air or Water होता है । इसी आधार पर कूलिंग सिस्टम मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं :
(1) Air Cooling system
(2) Water Cooling system

Air Cooling system

Air Cooling system में हवा के द्वारा इंजन की गर्मी को वातावरण में छोड़ा जाता है जिससे इंजन ठंडा होता है ।

Air Cooling system के important बिन्दु

Air कूल्ड इंजन में सिलिंडर ब्लॉक एवं सिलिंडर हैड पर Fins बने होते हैं । इन Fins के कारण सिलिंडर व हवा का contact area बढ़ जाता है, जिससे cooling अच्छी होती है ।

Cooling system
Cooling system


स्टेशनरी इंजन में ब्लोवर का प्रयोग होता है, जो Fins पर हवा की मात्रा व प्रवाह की गति को बढ़ा देता है ।


यदि multi cylinder इंजनों में Air Cooling system का प्रयोग किया जाएगा तो सभी सिलिंडरों के लिए अलग-अलग ब्लॉक बनाने पड़ेंगे ।

multi cylinder इंजनों में Air Cooling system के लिए अलग-अलग ब्लॉक ।


Air Cooling system का प्रयोग टू-व्हीलर एवं छोटे स्टेशनरी इंजनों में होता है ।

Advantages of Air Cooling system

रख-रखाव सरल होता है ।
इसमें पानी के जमने या जंग लगने की सम्भावना नहीं होती ।
संरचना सरल होती है ।
water pump, रेडिएटर आदि पार्ट्स नहीं होने से भार में हल्के होते हैं ।
water जैकेट नहीं होने से इंजन ब्लॉक की ढलाई आसान होती है ।

Dis-Advantages of Air Cooling system

शोर अधिक होता है ।
efficiency कम होती है ।
cooling speed कम होती है ।
वातावरण के तापमान से cooling speed प्रभावित होती है ।

Maintenance of Air Cooling system

Fins को हमेशा साफ रखना चाहिए क्योंकि यदि Fins पर गंदगी जमा होगी तो इनके द्वारा heat transfer अच्छी तरह से नहीं हो पाएगा । यदि ब्लोवर लगा है तो इसके बेल्ट को हमेशा उचित tight रखना चाहिए ।

Water Cooling system

Water Cooling system में पानी के द्वारा इंजन की गर्मी को अवशोषित करके वातावरण में छोड़ा जाता है जिससे इंजन ठंडा होता है । Water Cooling system में इंजन में water jacket बने होते हैं । इन water jacket में पानी प्रवाहित होता है जो इंजन की गर्मी को अवशोषित कर लेता है एवं पानी गर्म हो जाता है । गर्म पानी को रेडिएटर में ले जाकर ठंडा किया जाता है । रेडिएटर में ठंडे हुए इस पानी को पुनः water jacket में प्रवाहित किया जाता है ।

Water Cooling system

Types of Water Cooling system

॰ Thermo Syphon System

॰ Forced Feed System (Pump Circulation System)

Thermo Syphon System

इसमें water pump का प्रयोग नहीं होता । इसमें पानी का सरकुलेशन गर्म एवं ठंडे पानी की घनत्व में अंतर के कारण होता है । इंजन में बने हुए water jacket में पानी प्रवाहित होता है जहाँ पर यह इंजन की गर्मी को अवशोषित करके गर्म होकर हल्का हो जाता है एवं ऊपर की ओर गति करता है । यहाँ पर पानी रेडिएटर के upper tank में पहुँचता है एवं रेडिएटर कोर में बहते हुए ठंडा होकर रेडिएटर के lower tank में पहुँच जाता है । रेडिएटर के lower tank से पुनः यह इंजन की water jacket में प्रवेश करता है ।

Dis-Advantages Thermo Syphon System

इसमें अधिक मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है इसलिए रेडिएटर को बड़ा बनाना होता है । रेडिएटर में पानी कम हो जाने की स्थिति में यह सिस्टम कार्य नहीं कर पाता । यदि रेडिएटर , होज पाइप ,वॉटर जैकेट आदि में कोई रुकावट आ जाए तो यह system कार्य करना बंद कर देता है । इसकी efficiency भी कम होती है। इसलिए Thermo Syphon System का प्रयोग पुराने समय में किया जाता था। आज के समय में वाहनों में Forced Feed System का प्रयोग किया जाता है।

Forced Feed System (Pump Circulation System)
Cooling system

इसमें water pump का प्रयोग किया जाता है इसलिए इसे pump सरकुलेशन सिस्टम भी कहते हैं । इसमें पानी का सरकुलेशन water pump के द्वारा होता है । water pump को इंजन की क्रैंक शाफ्ट के द्वारा चलाया जाता है, इसके लिए क्रैंक शाफ्ट पर एक पुली लगी होती है । इस पुली के द्वारा बेल्ट के माध्यम से water pump को drive मिलती है ।

water pump का सम्बंध इंजन की क्रैंक शाफ्ट से होने के कारण water pump की speed, इंजन की speed पर निर्भर करती है । अर्थात इंजन की speed बढ़ने के साथ पानी के सरकुलेशन की speed भी बढ़ जाएगी ।

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