Carburetor | Providing the correct air-fuel ratio as required by the engine is the 1 major important task

Carburetor

पेट्रोल इंजन में सक्शन स्ट्रोक के दौरान हवा एवं पेट्रोल के मिश्रण का सक्शन होता है । हवा एवं पेट्रोल को इंजन की आवश्यकतानुसार उचित अनुपात में मिलाने का कार्य Carburetor द्वारा किया जाता है ।

Air-Fuel Ratio

हवा एवं पेट्रोल को इंजन की आवश्यकता अनुसार कई अनुपातों में मिलाया जाता है । मुख्यतः हवा एवं पेट्रोल का अनुपात ‘7:1 से 22:1’ तक होता है ।
7:1 का अर्थ है – पेट्रोल के 1 भाग को हवा के 7 भागों से मिलाना ।
22:1 का अर्थ है – पेट्रोल के 1 भाग को हवा के 22 भागों से मिलाना ।

हवा एवं पेट्रोल के मिश्रण को मुख्यतः तीन श्रेणियों में बांटा जाता है –
(1) Rich Mixture
(2) Stoichiometric Mixture
(3) Lean Mixture

Rich Mixture

7:1 से 12:1 तक का हवा-पेट्रोल का मिश्रण rich mixture कहलाता है । Rich Mixture का प्रयोग करने पर इंजन में शक्ति अधिक उत्पन्न होती है, परन्तु –
पेट्रोल की खपत ज्यादा होती है ।
इंजन अधिक एवं काला धुआँ छोड़ता है ।
इंजन में अधिक कार्बन जमा होता है ।

Stoichiometric Mixture

14.7:1 Stoichiometric रेश्यो /आदर्श अनुपात होता है । Stoichiometric अनुपात पर-
इंजन में उत्पन्न शक्ति अच्छी होती है ।
पेट्रोल की खपत कम /average अच्छा होता है ।
इंजन कम एवं रंगहीन धुआँ छोड़ता है ।
डीजल fuel के लिए Stoichiometric अनुपात 14.5:1 होता है ।

Lean Mixture

16:1 से 22:1 तक का हवा एवं पेट्रोल का अनुपात lean mixture होता है । 16:1 से 18:1 तक का मिश्रण Economical होता है । 22:1 का मिश्रण कमजोर होता है एवं इस पर इंजन के जलने की सम्भावना होती है ।

जब इंजन कम स्पीड पर चल रहा होता है, उस समय इंजन को lean मिश्रण की आवश्यकता होती है । इंजन की गति बढ़ने पर इंजन पर load भी बढ़ता है एवं इस समय इंजन को rich मिश्रण की आवश्यकता होती है ।

इसलिए इंजन की स्पीड एवं load के अनुसार हवा एवं पेट्रोल का सही मिश्रण तैयार करना Carburetor की प्रमुख जिम्मेदारी होती है ।
starting के समय या जब वाहन चढ़ाई कर रहा हो या उस पर अधिक load हो , तब भी इंजन को rich मिश्रण की आवश्यकता होती है ।
यानी इंजन की आवश्यकता अनुसार सही हवा -ईधन अनुपात उपलब्ध कराना ही Carburetor का प्रमुख कार्य है ।

Carburetor के मुख्य तीन क्रियाएँ या कार्य

(1) Mixing – हवा एवं पेट्रोल को अच्छी तरह mix करना ।
(2) Vaporisation – पेट्रोल का वाष्प में बदलना ।
(3) Automization – पेट्रोल का छोटे – छोटे बारीक कणों में टूटना ।

Carburetor वह device है जो –

इंजन की स्पीड , load आदि फैक्टर्स के आधार पर इंजन की आवश्यकता के अनुसार हवा एवं पेट्रोल का सही मिश्रण तैयार करता है । हवा एवं पेट्रोल को सही तरह से mix करता है । पेट्रोल का वाष्पीकरण करता है और पेट्रोल को ऑटोमाइज करता है।

Carburetor में हवा के प्रवाह की दिशा के आधार पर Carburetor मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं –

(1) Up-draft Carburetor
इनलेट मैनीफोल्ड के नीचे फिट होते हैं तथा इनमें हवा का flow नीचे से ऊपर की ओर होता है ।

Carburetor


(2) Down-draft Carburetor
इनलेट मैनीफोल्ड के ऊपर फिट होते हैं तथा इनमें हवा का flow ऊपर से नीचे की ओर होता है ।

Carburetor

(3) Side-draft / Horizontal Carburetor

इनलेट मैनीफोल्ड के side में फिट होते हैं तथा इनमें हवा का flow क्षैतिज होता है ।

Carburetor

बनावट

कार्ब्युरेटर एक नली का बना होता है, जिसके संतुलन हेतु एक प्लेट लगी होती है। इस पत्ती को थ्रोटल प्लेट कहा जाता है। यह प्लेट वायु के बहाव का नियंत्रण करके संतुलन बनाती है। इंजन के स्टार्ट होने पर ईंधन में मिश्रित होने वाली वायु के अनुपात को यही थ्रोटल-प्लेट नियंत्रित करती है। कार्ब्युरेटर के संकरे भाग, जिसे वेंच्युरी कहते हैं; में लगे एक जेट से निर्वात के द्वारा ईंधन को खींचा जाता है। इस ईंधन की गति वहाँ उपस्थित वायु के दबाव द्वारा नियंत्रित होती है।

Carburetor

यह बर्नॉली के सिद्धांत के अनुसार होता है। इसी सिद्धांत पर कार्ब्युरेटर काम करता है। यही कार्ब्युरेटर यदि वायु और ईंधन के अनुपात में गड़बड़ करने लगे, तो इंजन के स्टार्ट होने में समस्या आ जाती है। यह अनुपात अधिक होने पर इंजन काम नहीं करता है, बंद हो जाता है, या स्टार्ट ही नहीं हो पाता है। यही अनुपात बहुत कम होने पर इंजन खराब होने का खतरा भी होता है।

चोक

ठंडे वातावरण में, ईधन मुश्किल से वाष्पीकृत होता है और सिलिंडरों में जाने के बजाय, जल्दी ही कंडेन्स होकर इंजन की दीवारों पर जम जाता है। इस कारण सिलिंडरों पर पर्याप्त ईंधन मात्रा न पहुंच पाने से इंजन स्टार्ट होने में समस्या आती है। तब वायु-ईंधन का एक सघन मिश्रण (अधिक इंधन अनुपात) इंजन में तब तक भेजा जाता है, जब तक कि इंजन पर्याप्त तापमान पर पहुंच नहीं जाता, जिससे कि ईंधन अपने आप ही वाष्पीकृत होकर जेट से सिलिंडरों तक पहुँच जाये। इस अतिरिक्त ईंधन मात्रा को देने हेतु चोक का प्रयोग किया जाता है।

इस युक्ति के द्वारा कार्ब्युरेटर के प्रवेशद्वार पर वेन्च्युरी से पहले वायु का बहाव कम किया जाता है। इस कारण कार्ब्युरेटर बैरल में अतिरिक्त निर्वात उत्पन्न होता है, जो मुख्य धारा से अतिरिक्त ईंधन खींचता है और आगे देता है। इस तरह इंजन कम तापमान में भी स्टार्ट हो पाता है और सही तापमान आने पर चोक बंद कर दिया जाता है।

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