सौर ऊर्जा भविष्य | base of safe development

सौर ऊर्जा भविष्य में विकाश का एक आधार


विज्ञान और तकनीकी के विकास के बढ़ते कदम से हमारी जरूरतों के संसाधन और उनकी उपयोगिकता बढ़ती जा रही है | इन साधन और संसाधनों को चलाने के लिए किसी न किसी रूप में ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है | फिर वो विद्युत हो या जीवाश्म ईंधन | ये ऊर्जा हम परम्परागत स्रोतों से प्राप्त करते हैं |

ऊर्जाआधुनिक समाज के विकास का आधार है | परम्परागत ऊर्जा स्रोत कोयला, पेट्रोलियम, परमाणु ईंधन और प्राकृतिक गैस तेजी से समाप्त हो रहे हैं, साथ ही इनके दहन और उपयोग से पर्यावरणीय क्षति होती है | इसलिए अब यह आवश्यक हो गया है कि देश की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए देश में विद्यमान गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोतों की सम्भावनाओं को विकसित किया जाए | देश में गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोतों का विकास इसलिए जरूरी है क्योंकि इनसे पर्यावरणीय क्षति नहीं होता |

ऊर्जा न केवल परम्परागत स्रोतों में विद्यमान है बल्कि प्रकृति में गैर-परम्परागत स्रोत जैसे – पवन, सौर विकिरण, समुद्री लहरों आदि में भी ऊर्जा की सम्भावना है | अर्थात ऊर्जा प्रत्येक स्थान पर व्याप्त है, आवश्यकता है किस प्रकार से इसका समुचित उपयोग किया जाये |

गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोतों के अन्तर्गत पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा, बायोगैस, ज्वारीय ऊर्जा, तरंग ऊर्जा और बायोमास ऊर्जा आदि को शामिल किये जाते है | इसे नवीकरणीय अथवा अक्षय ऊर्जा, कभी समाप्त न होने वाले स्रोत भी कहते हैं |

देश में विद्यमान अक्षय ऊर्जा स्रोतों के विकास के लिए 1982 ई० में गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोत विभाग की स्थापना की गयी |
देश में गैर-परम्परागत ऊर्जा से संबंधित सभी पहलुओं पर देख-रेख करने के लिए गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोत मंत्रालय की स्थापना की गई |
देश में Non-conventional Energy (NCE) की कुल स्थापित क्षमता वर्ष 2020 तक 100000 मेगावाट हो गयी है जो कि देश में विद्युत की कुल स्थापित क्षमता का 24% है |

सौर ऊर्जा

देश में सौर ऊर्जा का उपयोग मुख्यतः दो रूपों में किया जाता है –
सूर्य की ऊर्जा को सीधे बिजली बनाकर के
सौरताप को भाप में परिवर्तित करके

solar photovoltaic technology अधिकाधिक क्षेत्र से सूर्य के प्रकाश को एकत्र कर विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित कर देता है |
Photovoltaic Cell को Solar Cell भी कहते हैं | जब कई सारे Soller cell को जोड़ दिया जाए तोsolar panel का निर्माण होता है|

Photovoltaic Cell वास्तव में एक शुद्ध सिलिकॉन का टुकड़ा होता है, जिसे सूर्य के प्रकाश के सम्पर्क में लाने पर विद्युत का निर्माण होता है |
विश्व में सिलिकॉन का प्रचुर भण्डार है | पृथ्वी का क्रस्ट लगभग 30 किमी०मोटा है | क्रस्ट में कमश: आक्सीजन, सिलिका, एल्यूमिनियम तथा लोहा सबसे अधिक मात्रा में पाया जाता है |

पृथ्वी के क्रस्ट में आक्सीजन के पश्चात सिलिका सर्वाधिक मात्रा में है| अत: सिलिका की प्रचुरता के कारण बड़े मात्रा में Photovoltaic Cell का निर्माण किया जा सकता है |
देश के विभिन्न क्षेत्रों में सौर ऊर्जा की बड़ी सम्भावना है| देश में सौर ऊर्जा का विकास करने के लिए 2010 में एक कार्यक्रम जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन(JNNSM)की शुरूआत की गयी |

जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन के अन्तर्गत 13वीं पंचवर्षीय योजना के अन्त तक अर्थात् 2022 तक 20 हजार मेगावाट सौर विद्युत उत्पादन करने का लक्ष्य रखा गया है | इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए देश में अनेक सोलर वैलियों का निर्माण किया जा रहा है |

सोलर वैली ऐसा औद्योगिक क्षेत्र है जिसमें ऊर्जा के रूप में केवल सौर ऊर्जा का निर्माण और उपयोग किया जायेगा |

आज हम सोलर पैनल की मदद से अपनी बिजली बना सकते हैं। सौर्य बिजली हमें कुछ हद तक पावर सप्लाय की बिजली से स्वतंत्र कर देती है। तो सवाल यह होता है कि क्यों ना रिक्शा के ऊपर ही सोलर पैनल लगा कर रिक्शा को चलाया जाय? क्या यह संभव है कि ऐसी सोलर रिक्शा के चलते-चलते उसकी बैटरी चार्ज भी होती जाय? और बार-बार उसे 220 वोल्ट के सॉकेट तक चार्जिंग के लिए ले जाना ना रहे?

सोलर पैनल्स की सौर ऊर्जा भविष्य में ग्रहण करने की efficiency शायद बढ़े। तब संभव हो कि सोलर रिक्शा के चलते-चलते उसकी बैटरी चार्ज भी होती रहे |

रीवा, मध्‍य प्रदेश: प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी जी ने वीडियो कॉन्‍फ्रेंस के माध्‍यम से मध्‍य प्रदेश के रीवा में अत्‍याधुनिक मेगा सौर ऊर्जा परियोजना राष्‍ट्र को समर्पित की। यह एशिया की सबसे बड़ी सौर ऊर्जा परियोजना है।

प्रधानमंत्री मोदी के भाषण की अहम बातें

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि मौजूदा दशक में रीवा परियोजना पूरे क्षेत्र को स्‍वच्‍छ और सुरक्षित ऊर्जा के बड़े केन्‍द्र के रूप में बदल देगी। उन्‍होंने कहा कि इस परियोजना से दिल्‍ली मेट्रो सहित रीवा और उसके आस-पास के समूचे क्षेत्र को बिजली की आपूर्ति की जाएगी।

सौर ऊर्जा भविष्य में विकाश का एक आधार
प्रधानमंत्री मोदी जी

प्रधानमंत्री ने कहा कि बहुत जल्द मध्य प्रदेश भारत में सौर ऊर्जा भविष्य का मुख्य केंद्र होगा, क्योंकि नीमच, शाजापुर, छतरपुर और ओंकारेश्वर में ऐसी कई प्रमुख परियोजनाओं पर काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के गरीबों, मध्यम वर्ग के लोगों, आदिवासियों और किसानों को इसका सबसे ज्‍यादा फायदा मिलेगा। उन्‍होंने कहा कि सौर ऊर्जा भविष्य (21 वीं सदी) में आकांक्षी भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने का एक प्रमुख माध्यम होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सौर ऊर्जा ‘निश्चित, शुद्ध और सुरक्षित’ है। सूर्य से ऊर्जा की निरंतर आपूर्ति के कारण इसका हमेशा मिलना सुनिश्चित है तथा पर्यावरण के अनुकूल होने के कारण यह शुद्ध होती है और इसके अलावा यह हमारी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए एक सुरक्षित स्रोत भी है।

श्री मोदी ने कहा कि इस तरह की सौर ऊर्जा परियोजनाएं आत्मानिर्भर भारत का सही प्रतिनिधित्‍व करती हैं।

उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था आत्मनिर्भरता और प्रगति का एक महत्वपूर्ण पहलू है। अर्थव्यवस्था या फिर पारिस्थितिकी पर ध्यान केंद्रित करने की दुविधा का उल्लेख करते हुए, प्रधानमंत्री जी ने कहा कि भारत ने सौर ऊर्जा परियोजनाओं और अन्य पर्यावरण के अनुकूल उपायों पर ध्यान केंद्रित करके ऐसी दुविधाओं का समाधान किया है। उन्‍होंने कहा कि अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी एक-दूसरे के पूरक हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार के सभी कार्यक्रमों में पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ जीवन की सुगमता को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने स्वच्छ भारत, गरीबों के घरों में एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति, सीएनजी नेटवर्क के विकास जैसे कार्यक्रमों का जिक्र किया, जिसमें जीवन को आसान बनाने तथा गरीबों और मध्यम वर्ग के जीवन को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।प्रधानमंत्री जी ने कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा केवल कुछ परियोजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीने का एक तरीका है।

उन्‍होंने कहा कि जब नवीकरणीय ऊर्जा की बड़ी परियोजनाएं शुरू की जाती हैं तो यह सुनिश्चित किया जाता है, कि स्वच्छ ऊर्जा के प्रति दृढ़ संकल्प जीवन के हर क्षेत्र में दिखाई दे। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है, कि इसका लाभ देश के हर कोने, समाज के हर वर्ग, हर नागरिक तक पहुँचे। उन्होंने इस बारे में एलईडी बल्बों का उदाहरण पेश करते हुए बताया कि किस तरह इनके इस्‍तेमाल ने बिजली के बिल को कम किया है। एलईडी बल्बों के इस्‍तेमाल की वजह से लगभग 4 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड को पर्यावरण में जाने से रोका जाता है। उन्होंने कहा कि इससे 6 अरब यूनिट बिजली की बचत हुई है, जिससे सरकारी खजाने के 24,000 करोड़ रुपये बचे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार ‘हमारे पर्यावरण, हवा, पानी को भी साफ बनाए रखने की दिशा में काम कर रही है, और यह सोच सौर ऊर्जा, नीति और रणनीति में भी दिखाई देती है। श्री मोदी ने कहा कि सौर ऊर्जा भविष्य के क्षेत्र में भारत की अनुकरणीय प्रगति दुनिया के लिए दिलचस्‍पी की एक बड़ी वजह होगी। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रमुख कदमों के कारण, भारत को स्वच्छ ऊर्जा और सौर ऊर्जा भविष्य का सबसे आकर्षक बाजार माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) को सौर ऊर्जा के मामले में पूरी दुनिया को एकजुट करने के मकसद से शुरू किया गया था। उन्होंने कहा कि इसके पीछे वन वर्ल्ड, वन सन, वन ग्रिड की भावना थी।
उन्होंने आशा व्यक्त की कि बहुत जल्द भारत पावर का एक प्रमुख निर्यातक होगा, प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत फोटोवोल्टिक सेल, बैटरी और स्टोरेज जैसे सौर संयंत्रों के लिए आवश्यक विभिन्न हार्डवेयर के आयात पर अपनी निर्भरता को कम करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

उन्होंने कहा कि इस दिशा में काम तेजी से आगे बढ़ रहा है और सरकार उद्योग, युवाओं, एमएसएमई और स्टार्टअप्स को इस अवसर से न चूकने और सौर ऊर्जा भविष्य के लिए आवश्यक सभी वस्‍तुओं के उत्पादन और बेहतरी के लिए काम करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

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