बिजली बनाए | safe environment and bright future

बिजली बनाए पर्यावरण और पैसे बचाएं

डॉ॰ नरेश जोतवानी आई॰आई॰टी॰ मुंबई के वर्ष 1973 के स्नातक हैं, जिसके बाद उन्होने अमरीका में अनुस्नातक पढ़ाई करी | पिछले कुछ 40 सालों से वे कम्प्युटर हार्डवेयर,सॉफ्टवेयर और सौर्य ऊर्जा के कार्यक्षेत्र में काफी सक्रिय रहे हैं| वे मानते हैं कि सौर्य ऊर्जा के बारे में देश-विदेश के लोगों को सही और उपयोगी जानकारी देना आज एक महत्वपूर्ण काम है”|

भारत में विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में निरंतर होते विकास के कारण लोग छोटी – छोटी आवश्यकताओं के लिए बिजली पर निर्भर हैं| हमारी दैनिक आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए घरों में आने वाली बिजली सामान्यतः कोयला, प्राकृतिक गैस या जलविद्युत् ऊर्जा से बनाई जाती है| ऊर्जा उत्पन्न करने के यह उपलब्ध स्रोत तेजी से समाप्त हो रहें हैं| इन स्रोतों से उत्पन्न बिजली महँगी होती है, जिससे बिजली बिल ज्यादा आता है| तो क्यूँ ना हम अपनी खुद की बिजली बनाए और प्रयोग करें।

आज लगभग हर आवश्यकता बिजली से ही पूर्ण की जाती है, और बिजली की भारी खपत को पूरा करने के लिए विभिन्न स्रोतों से बिजली बनाए जाते है| ऊर्जा के इन्ही स्रोतों में सौर ऊर्जा भी शामिल है, जिसका प्रचलन बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है| बढ़ती महंगाई के कारण लोग सोलर पैनल का उपयोग कर खुद की बिजली बनाए और प्रयोग करें, क्योंकि सौर ऊर्जा से उत्पन्न हुई बिजली सस्ती होती है, साथ ही सोलर पैनल का रख-रखाव भी आसान होता है| दुनियाभर में सोलर पैनल का प्रचलन बढ़ रहा है, लेकिन सोलर ऊर्जा के बारे में बहुत सारी ऐसी बातें हैं जिनके बारे में सबको नहीं पता होता है|

बिजली बनाए
सोलर पैनल – आओ बिजली बनाए

सोलर पैनल एक ऐसा उपकरण होता है जो सूरज से आने वाली किरणों को सोखने का काम करता है, और इसमें लगी बैटरी फोटोवोल्टिक प्रभाव की मदद से सूरज की किरणों को विद्युत् ऊर्जा में परिवर्तित करती हैं| आजकल दुनिया के बहुत सारे शहरों और गांवों में लोग सोलर पैनल से उत्पन्न होने वाली बिजली का इस्तेमाल करते हैं ,क्योंकि यह सस्ता भी होता है और साथ ही सोलर पैनल से पर्यावरण को कोई नुक्सान भी नहीं होता है| सोलर पैनल के लिए सूरज की किरणें ही मुख्य स्त्रोत होती हैं, और धरती पर यह ऊर्जा प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है|

सौर ऊर्जा

सौर ऊर्जा सबसे प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है
सामान्यतः ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए जीवाश्म ईंधन जैसे स्रोत का प्रयोग किया जाता है, ये एक बार प्रयोग होने के बाद इनका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है|और इस तरह के स्रोत धरती से कभी भी समाप्त हो सकते हैं | सौर ऊर्जा अत्यधिक विस्तारित, न्यूनतम प्रदुषणकारी और अक्षुण ऊर्जा है तथा धरती पर ऊर्जा के उपलब्ध स्रोतों में सौर ऊर्जा सबसे प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है|

नवीकरण योग्य ऊर्जा

सौर ऊर्जा नवीकरण योग्य ऊर्जा है| यह एक ऐसा स्रोत है, जिसे लंबे समय तक प्रयोग किए जा सकते हैं, सोलर पैनल द्वारा सुरक्षित व स्वच्छ बिजली बनाए जा सकते है | ऊर्जा के अन्य स्रोत समाप्त हो सकते हैं| लेकिन सौर ऊर्जा समाप्त नहीं होगी| धरती पर उपलब्ध अन्य स्रोत जैसे कोयला, पेट्रोलियम आदि समाप्त होने की कगार पर हैं, जिसके कारण लोग सौर ऊर्जा के महत्त्व को समझ रहे हैं और आजकल सोलर पैनल से बिजली बनाए जाने की ओर लोगों का रुझान ज्यादा है|

बिजली बिल में कटौती

आज के तकनीकी युग में रोज नए उपकरण प्रयोग में आ रहें हैं, और अब तो सौर्य ऊर्जा से बिजली बनाए जाने के साधन भी आसानी से घरों में लगाए जा रहे हैं। तो इस नए तकनीकी माहोल में कुछ सुझाव हैं, जिसकी सहायता से आप न सिर्फ अपना बिजली बिल कम कर सकते हैं, बल्कि सौर्य ऊर्जा के माध्यम से अपनी बिजली बनाए जिससे कुछ राशि कमा भी सकते हैं।

शायद आप के लिए बिजली का खर्च एक छोटी बात है, और उसके बढ़ जाने से आपको कोई समस्या नहीं होती। फिर भी किसी चीज का अनावश्यक उपयोग क्यों करें? फिर चाहे बिजली,पानी या खाने पीने की कोई चीज हो। अनावश्यक उपयोग का तो जीवन में कोई अर्थ नहीं होता।

बिजली के बिना आज का घरेलू या व्यावसायिक जीवन संभव नहीं है। पर हमारी हमेशा यह कोशिश रहती है कि बिजली बिल के ऊपर कुछ काबू हो या हमारे बजट की सीमा मे हो। सौर ऊर्जा द्वारा बिजली बनाए जाने के लिए सोलर पैनल बनाये जाते हैं, जिनकी मदद से बिजली बिल में कटौती की जा सकती है| सौर ऊर्जा द्वारा स्वच्छ,सुरक्षित व अप्रदूषणकारी बिजली बनाए जाने के लिए सोलर पैनल लगवाने का ही शुरुआती खर्च होता है| सोलर पैनल लगने के बाद बिजली बनाए ताकि बिजली का बिल न्यूनतम रहे,और इसका इस्तेमाल भी बहुत आसान होता है|

घर में सौर्य ऊर्जा से ए.सी. मॉड्यूल द्वारा बिजली बनाए जो कि आधुनिक साधन है। इसमें सोलर पैनल के साथ ही उसका अपना एक माइक्रो-इन्वर्टर लगा होता है, जिसके माध्यम से बिजली का ए॰सी॰ पावर ही सीधा ग्राहक को मिलता है। आई॰ओ॰टी॰ के साथ भी हरेक ए॰सी॰ मॉड्यूल जुड़ा होता है, जिससे हरेक मॉड्यूल की निगरानी व नियंत्रण आसानी से हो सकते हैं|
दोपहर के आसपास के कुछ 5-6 घंटों में यानी कि सुबह लगभग 10-10:30 am से लेकर – सौर्य बिजली का उत्पादन अधिकतम होता है। अगर उस समय घर में बिजली का उपयोग उत्पादन से कम हो रहा है, तो उस अतिरिक्त बिजली का क्या होगा?

विकल्प 1: कई राज्यों में सरकार ने नियम बनाए हैं कि घरों में बिजली बनाए अतिरिक्त बिजली नेट मीटरिंग के माध्यम से बिजली की पावर सप्लाय में वापस भेजी जाय। और उस वापस भेजी हुई बिजली का आर्थिक लाभ बिजली के ग्राहक को मिले।

मान लीजिए कि घर में दोपहर के आसपास 5 यूनिट सौर्य बिजली पैदा हुई, पर उन घंटों में सिर्फ 1 यूनिट बिजली का घरेलू उपयोग हुआ। तो बाकी के 4 यूनिट बिजली सप्लाय में वापस जाएगी, और वह ग्राहक के जमा-खाते में रहेगी। सूर्यास्त के बाद, और दूसरी सुबह, अगर 4 यूनिट बिजली का उपयोग हुआ, तो वह उसी जमा-खाते में से निकलेगा। यानी कि कुल 5 यूनिट बिजली का व्यय जो हुआ, उनसे बिजली के बिल में कुछ नहीं चढ़ेगा, क्योंकि इतनी सौर्य बिजली घर में पैदा हुई थी।

अगर बिजली का व्यय कुल 7 यूनिट होता, तो उनमें से सिर्फ 2 यूनिट ग्राहक के बिल में चढ़ते, क्योंकि 5 यूनिट सौर्य बिजली तो घर में ही पैदा हुई थी। वैसे ही, उस दिन अगर बिजली का व्यय मात्र 3 यूनिट होता, तो बाकी के 5-3= 2 यूनिट पावर कंपनी में ग्राहक के जमा-खाते में रहते। ऐसे जमा हुए यूनिटों की कीमत बीजली के रेट के अनुसार लगाई जाती है।

अगर आपके घर का सोलर सिस्टम इस प्रकार से दोपहर के घंटों में पावर सप्लाय को बिजली वापिस दे सकता है, तो आप के बिजली के बिल में काफी कटौती आएगी। आप जरूर सोलर सिस्टम के सप्लायर से यह जान लें कि यह नेट मीटरिंग की व्यवस्था आपके शहर में उपलब्ध है या नहीं।

विकल्प 2: अगर नेट मीटरिंग की व्यवस्था आपके शहर में उपलब्ध नहीं है, तो आपके हित में रहेगा कि घर के ज्यादा पावर वाले उपकरणों का उपयोग जहां तक हो सके दोपहर के आसपास के घंटों में ही करें। वॉशिंग मशीन, पानी का पंप, इत्यादि उपकरण इन घंटों में चलाये जा सकते हैं।
इस परिस्थिति में – पावर सप्लाय कंपनी के नियमानुसार – Envoy जैसा निगरानी का एक खास उपकरण भी आपको सोलर सिस्टम के साथ लगाना होगा ।

अन्य विकल्प: एक बैटरी-युक्त होम इन्वर्टर भी अगर आप लगाएँ, तो वह घर में ही पैदा हुई बिजली का संग्रह करेगा और पावर सप्लाय ना होने के समय आप की सुविधा में वृद्धि करेगा। और क्योंकि सौर्य बिजली के होते आप पावर सप्लाय से बिजली कम लेंगे, तो आपके बिजली के बिल में बचत होगी।

नेट मीटरिंग

नेट मीटरिंग ग्रिड से जुडी हुई घरेलू रूफ-टॉप सोलर सिस्टम की एक बहुत जरूरी प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया का काम –
सौर्य बिजली का उत्पादन सुबह 10-10:30 am बजे से लेकर कुछ 5-6 घंटों तक अधिकतम होता है, क्योंकि इस दौरान सूरज की सबसे ज्यादा रोशनी सोलर पैनलों के ऊपर गिरती है।

ग्राहक के हित में है कि सोलर सिस्टम के साथ बिजली कंपनी की पावर सप्लाय का घरेलू कनैक्शन भी चालू रखा जाय। जैसे कि अगर बादलों के कारण सौर्य बीजली का उत्पादन बंद है, तो तब ग्रिड की बिजली काम में आएगी।
बिजली के उपकरणों में बिजली की ऊर्जा का जो व्यय होता है, उसका हिसाब kilowatt-hour में होता है। यहाँ 1 kWh उतनी ऊर्जा है जो किसी 1 किलोवॉट वाले उपकरण को 1 घंटे तक चला सके। किलोवॉट-अवर को अक्सर यूनिट (unit) भी कहा जाता है।

घर में बिजली का उपयोग मौसम के साथ बदलता रहता है, और हर दिन हमारी दिनचर्या के अनुसार भी बदलता रहता है। दोपहर के आस-पास, जब सौर्य बिजली का उत्पादन अधिकतम होता है, तब जरूरी नहीं है कि उस सारी बिजली का उपयोग घर में हो रहा हो।

ऐसे जब सौर्य बिजली घर में मिल रही है, पर उसका पूरा उपयोग नहीं हो रहा, तो उस बिजली को बिजली कंपनी की ग्रिड में वापिस भेजने का प्रयोजन ग्रिड से जुडी सोलर सिस्टम में होता है। इस प्रक्रिया को घर से ग्रिड में बिजली को एक्सपोर्ट (export) करना। और जब ग्रिड से बिजली घर में ली जाती है, उसे कहते हैं बिजली को इम्पोर्ट (import) करना। पुराने दिनों में घरों में बिजली सिर्फ इम्पोर्ट होती थी, क्योंकि सोलर सिस्टम नहीं था।

घरेलू सोलर सिस्टम से ग्रिड में जितनी बिजली एक्सपोर्ट होती है, उतनी बिजली पावर सप्लाय कंपनी में ग्राहक के खाते में जमा रहती है। जब सौर्य बिजली का उत्पादन नहीं हो रहा है या तो वह उपयोग से कम हो रहा है – तब यह जमा खाते वाली बिजली ग्राहक को बिना किसी खर्च के वापिस मिलती है। यानी कि ग्रिड बिजली के एक बहुत बड़े भंडार जैसा काम करती है, जहां से ग्राहक अपने उपयोग के अनुसार बिजली की लेन-देन करता है।

पावर सप्लाय कंपनी ग्राहक के बिजली के एक्सपोर्ट और इम्पोर्ट का एक अलग खाता रखती है, जिसमें ग्राहक के बिजली के उत्पादन और व्यय का पूरा हिसाब रहता है।
उदाहरण: मान लीजिए कि ग्राहक ने एक महीने में कुल 300 यूनिट बिजली का उपयोग किया। इनमें से 140 यूनिट बिजली उसे अपनी सोलर सिस्टम से मिली। तो उसका बिल बनेगा बाकी के 300 – 140 = 160 यूनिट बिजली का। घर में चाहे कभी भी बिजली का उपयोग हो – सुबह, दोपहर, शाम या रात्रि, बिल तो 160 यूनिट का ही बनेगा।

लाभ: स्पष्ट है कि नेट मीटरिंग की मदद से ग्राहक को दो बडे लाभ मिल रहे हैं। (1) एक लाभ यह है कि वह बिजली का उपयोग दिन में कभी भी कर सकता है, चाहे उस समय सौर्य बिजली का उत्पादन हो या ना हो। (2) दूसरा लाभ यह है कि उसे अपने घर में पैदा की गई बिजली की पूरी कीमत मिल रही है, अगर बिजली ग्रिड में एक्सपोर्ट हो रही है।

नेट मीटरिंग की सुविधा पाने के लिए ‘टू-वे’ मीटर (bi-directional meter) नाम का एक इलेक्ट्रोनिक मीटर घर में लगाना होता है, जो हर सेकंड इम्पोर्ट या एक्सपोर्ट हो रही बिजली का हिसाब रखता है। बिजली का मासिक या द्विमासिक बिल मीटर के इम्पोर्ट और एक्सपोर्ट दोनों रीडिंग के आधार बनता है।

घर में सोलर सिस्टम के साथ नेट मीटरिंग लगवाने के लिए पावर सप्लाय कंपनी और राज्य सरकार दोनों से स्वीकृति लेनी होती है।

गाँवों में बिजली की उपलब्धता

घरेलू सौर प्रणाली के तहत गाँव, पहाड़ों, और दूर दराज़ के इलाकों में भी विद्युतिकरण के सपने को सच किया गया है| और आज भारत के जिन गाँवों में अन्य स्त्रोत से बिजली का उत्पादन नहीं किया जा सकता है, उन गाँवों में सौर ऊर्जा की मदद से बिजली पहुंचाई जा रही है|

केंद्र सरकार और राज्य सरकारें भी सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए काम कर रही हैं, जिसके कारण घरेलू सौर ऊर्जा के इस्तेमाल में बढ़ोत्तरी हुई है| घरों में सौर ऊर्जा से इस्तेमाल होने वाले उपकरणों में सोलर वाटर हीटर, सोलर पावर प्लांट, सोलर रूफटॉप इन्वर्टर, और सोलर वाटर पंप सिस्टम जैसे उपकरण शामिल होते हैं| आज सौर ऊर्जा अपार ऊर्जा का स्त्रोत बन चुकी है और भविष्य में भी सौर ऊर्जा की मांग में बढ़ोत्तरी होगी|

सोलर सिस्टम खरीदने से पहले काफी लोग गलती कर देते हैं, वह बिना सोचे समझे सोलर सिस्टम लगवा लेते हैं .उन्हें नहीं पता होता कि कितने बड़े सोलर सिस्टम पर कितना लोड चला सकते हैं| तो ऐसी गलती आप बिल्कुल ना करें सबसे पहले आप अपने सभी उन उपकरण का लोड पता करें जो आप सोलर सिस्टम पर चलाना चाहते हैं| और उन सभी उपकरणों का लोड जोड़ लें जैसे कि

2 Ceiling fan = 160 watt (80+80 w)
5 CFL Light = 100 watt (20w per Light)
1 Ton Air Conditioner = 1200 watt
32 Inch LED Tv = 50 watt

Total = 160 + 100 + 1200 +50 = 1510 Watt (1.5 kw) (अनुमानित)

आपको सोलर सिस्टम पर 1510 watt लोड चलाना है, तो इसके लिए आप को कम से कम 2 KW सोलर सिस्टम लगवाना होगा | लेकिन अगर आप ऑफ ग्रिड सोलर सिस्टम लगवाते हैं, तो आपको इसमें बैटरी को चार्ज करने के लिए भी पावर की आवश्यकता होगी| इसीलिए आपको 2 KW से ज्यादा बड़ा सोलर सिस्टम लगवाना होगा | क्योंकि जब सोलर सिस्टम पर आप लोड चलाएंगे तो उस समय बैटरी को भी चार्ज करना पड़ेगा ताकि जब सोलर पैनल से सप्लाई आनी बंद हो तब आप के उपकरण बैटरी से चलने लगे, तो आपको कम से कम 3 kw का ऑफ ग्रिड सोलर सिस्टम लगवाना पड़ेगा |

बिजली का उपयोग आज हर घर में किया जा रहा है, और दिन प्रतिदिन यह उपयोग बढ़ता ही जा रहा है | लेकिन इसी के साथ बिजली की कीमत भी बढ़ रही है, इसीलिए हम बिजली बचाने की ज्यादा से ज्यादा कोशिश करते हैं| बिजली बचाने के लिए हम हमारे उपकरण का उपयोग करना कम कर देते हैं| लेकिन कुछ ऐसे उपकरण होते हैं, जिनका इस्तेमाल हमें हर हाल में करना पड़ता है| इसीलिए बिजली बचाने के लिए हमें सोलर सिस्टम का इस्तेमाल करना पड़ता है, सोलर सिस्टम लगवाने के बाद में हम इससे बिल्कुल मुफ्त में बिजली का इस्तेमाल कर सकते हैं।

पानी का घरेलू पम्प चलायें

पानी हरेक घर की एक अहम आवश्यक्ता है। तो स्वाभाविक है कि सोलर सिस्टम के साथ-साथ पानी की घरेलू व्यवस्था में सुधार लाना आवश्यक है |आज हम देखेंगे कि घरेलू सोलर सिस्टम के साथ पानी का पम्प कैसे जोडा और चलाया जा सकता है।
पानी के घरेलू पम्प ज्यादातर 0.5 HP या 1 HP के सिंगल फेस पम्प होते हैं। यानी कि पम्प की बिजली की खपत लगभग 400 वॉट या 746 वॉट की होती है। पानी को कितने मीटर ऊपर चढ़ाना है, उसके पर पम्प की रेटिंग निर्धारित होती है।

रोज़ दिन में 12 या 1 बजे के आस-पास पम्प चलाना हित में है। ऐसा करने से पैनल से उत्पन्न सौर्य बिजली का ज्यादा उपयोग होगा। अगर इस समय घर में अक्सर कोई नहीं होता, तो टाइमर और सेन्सर की मदद से इस प्रक्रिया को स्वचालित भी किया जा सकता है। अगर जरूरी हो तो पानी की ऊपर जाती हुई पाईप में फ़िल्टर भी लगाया जा सकता है।

ऊपर की टंकी भरने में कितना समय लगेगा? यह निर्भर करता है घर में होते हुए पानी के दैनिक व्यय पर। सामान्यतः यह समय 15 मिनट से ले कर 45 मिनट तक हो सकता है। स्पष्ट है कि बड़े परिवार में समय कुछ ज्यादा लगेगा। ऊपर की टंकी की कुल क्षमता के ऊपर यह समय निर्भर नहीं करता, क्योंकि वह टंकी रोज़ खाली नहीं हो रही है।

कपडे धोने की वॉशिंग मशीन में पानी का काफी व्यय होता है। मान लीजिए कि वॉशिंग मशीन घर में हर दूसरे दिन चलती है। तो जिस दिन वॉशिंग मशीन चलती है, पम्प कुछ 15 या 20 मिनट ज्यादा चलेगा।

बिजली की ए.सी. मोटर जब चालू की जाती है, तब वह अपनी रेटिंग से लगभग 3 गुना ज्यादा करंट कुछ क्षणों के लिए लेती है। यह बात पानी के घरेलू पम्प की मोटर को भी लागू होती है। अगर आपका इन्वर्टर 1 किलोवॉट का है, तो वह पम्प को चालू करते समय ओवर-करंट से ट्रिप हो जाएगा। यह समस्या ना आए इसके लिए हम यह सुझाव देंगे:

1 किलोवॉट की सोलर पैनल के साथ इन्वर्टर 2 या 3 किलोवॉट का रखिए। इससे आपकी लागत में कुछ बढ़ोतरी जरूर होगी, पर आप का सिस्टम ज्यादा अच्छे से चलेगा । और सोलर सिस्टम के साथ आप बैकप बैटरी भी जरूर लगवाएँ। इससे आपका पम्प बेहतर चलेगा, और बाहर का पावर सप्लाय बंद होने पर भी घर में कोई असुविधा न होगी।
आपके सिस्टम के साथ किस प्रकार का इन्वर्टर लगेगा, यह निर्भर करता है आपके सोलर पैनल के ऊपर। अगर आप अध्यतन ए.सी. मॉड्यूल लेते हैं, तो यह काम बहुत ही आसान हो जाता है।

सोलर पैनल कुछ 25 सालों तक सौर्य बिजली का उत्पादन देते हैं। हमारे खरीदे हुए कोई भी अन्य साधन – जैसे कि कार, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, इत्यादि इतने साल नहीं चलते। तो हर दो-तीन साल में सोलर सिस्टम में बदलाव मुश्किल है।

सोलर सिस्टम के चयन के समय लम्बी अवधि की सोच रखना ही लाभदायक होगा । पम्प, पैनल, इन्वर्टर और बैटरी की क्षमता इन सभी मुद्दों को ध्यान में रख कर ही निर्धारित करना चाहिए। ऐसा करने से सालों तक सभी परिवारजन घर में ही पैदा हुई सौर्य बिजली की सुविधा का पूरा आनंद उठा सकेंगे।

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